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NEET पेपर लीक पर देश की राजनीति गरमाई: प्रधानमंत्री मोदी ने बताया ‘घोर पाप’, राहुल गांधी का पीएम आवास पर धरना, धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार; छात्रों के मुद्दे पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026।
देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक मामले ने अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसदीय दल की बैठक में इस पूरे प्रकरण को “घोर पाप” करार देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार को घेरा। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए तीखा पलटवार किया।
📍प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसदीय दल की बैठक में कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने पेपर लीक की जानकारी मिलते ही तत्काल कार्रवाई की, जांच एजेंसियों को सक्रिय किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए। प्रधानमंत्री ने बताया कि मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रणाली पर नहीं, बल्कि देश के लाखों मेहनती छात्रों के सपनों पर हमला हैं। उन्होंने इसे “घोर पाप” बताते हुए सभी राज्य सरकारों से अपील की कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए मिलकर काम करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के लिए किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
📍इधर, NEET पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम और प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया।
दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी प्रियंका गांधी से मिलने थाने पहुंचीं। देर शाम करीब नौ बजे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और छात्रों का भविष्य क्यों दांव पर लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा इतनी महंगी हो चुकी है कि परिवारों को अपनी पूरी जमा-पूंजी खर्च करनी पड़ रही है, फिर भी युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा का भरोसा नहीं मिल रहा।
राहुल गांधी ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें भी रखीं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। साथ ही प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई, छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, प्रधानमंत्री से सार्वजनिक माफी मांगने, संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने तथा परीक्षा एवं शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने की मांग की।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने कांग्रेस के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार अपने रुख बदल रही है। उनके अनुसार पहले संसद में चर्चा की मांग की गई, लेकिन अब केवल इस्तीफे की राजनीति की जा रही है।
📍सबसे तीखी प्रतिक्रिया केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की ओर से आई। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर राहुल गांधी और कांग्रेस पर छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब सरकार संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, तब कांग्रेस समाधान के बजाय केवल राजनीतिक प्रदर्शन और टकराव का रास्ता अपना रही है।
धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर धरना देकर कांग्रेस ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी अनदेखी की और आम लोगों को असुविधा पहुंचाई। उनके अनुसार लोकतांत्रिक बहस छोड़कर सड़क पर राजनीतिक प्रदर्शन करना कांग्रेस की मंशा को उजागर करता है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान निकालना नहीं, बल्कि राजनीतिक सुर्खियां बटोरना है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी छात्रों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और संसद के मॉनसून सत्र को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े हर वास्तविक मुद्दे पर संसद में चर्चा करने तथा आवश्यक सुधार लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश के छात्र किसी राजनीतिक अभियान का माध्यम नहीं, बल्कि सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के हकदार हैं। उन्हें केवल नारों की नहीं, बल्कि जवाब, सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता है।
उधर, जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहा। सोमवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद देर शाम फिर प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन जारी रखा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद NEET पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद से लेकर सड़क तक सत्ता और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक संघर्ष बन चुका है।
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