सरकारी अस्पताल का हाल :गार्ड लगाता है मरीजों को इंजेक्शन…….

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सिंगरौली के चितरंगी अस्पताल में सुरक्षा गार्ड द्वारा मरीजों को इंजेक्शन लगाने का वीडियो वायरल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

सिंगरौली (मध्य प्रदेश), 09 जून 2026.

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में अस्पताल का एक सुरक्षा गार्ड मरीजों को इंजेक्शन लगाते और ड्रिप चढ़ाते हुए दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि उस समय अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक थी, लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्स मौजूद नहीं थे, जिसके चलते गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, चितरंगी क्षेत्र के इस सरकारी अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। वायरल वीडियो के बाद लोगों में आक्रोश है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि जब अस्पताल में योग्य चिकित्सकीय स्टाफ उपलब्ध नहीं रहता, तब लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

लोगों का कहना है कि किसी सुरक्षा गार्ड या गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा इंजेक्शन लगाना या ड्रिप चढ़ाना न केवल चिकित्सा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। ऐसे मामलों में संक्रमण, गलत दवा देने या अन्य चिकित्सकीय जटिलताओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।

वायरल वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।( यहाँ NGV PRAKASH NEWS वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता)

सिंगरौली जिला, जिसे देश की “ऊर्जा राजधानी” के रूप में जाना जाता है, वहां सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी इस तरह की तस्वीरें सामने आना प्रशासन के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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