क्या शिक्षा मंत्रालय एनडीए सरकार के लिए ‘अभिशप्त’ है ? 12 साल में किसी का भी नहीं पूरा हुआ 5 साल का कार्यकाल…….

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क्या शिक्षा मंत्रालय एनडीए सरकार के लिए ‘अभिशप्त’ साबित हुआ? 12 साल में चार मंत्री बदले, कोई भी लगातार पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका

👉 इसके साथ ही सरकार है यह गुरुर भी टूट गया कि वह जो कर रही है सब सही है और लोग देर सबेर उसे मान लेंगे

नई दिल्ली, 26 जुलाई 2026।.

शिक्षा किसी भी देश के भविष्य की नींव मानी जाती है, लेकिन केंद्र में एनडीए सरकार के पिछले 12 वर्षों के दौरान शिक्षा मंत्रालय में लगातार हुए नेतृत्व परिवर्तन ने कई सवाल खड़े किए हैं। 2014 से 2026 के बीच मंत्रालय की कमान चार अलग-अलग नेताओं ने संभाली, लेकिन कोई भी लगातार पांच वर्षों का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। ताजा घटनाक्रम में धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या शिक्षा मंत्रालय सरकार के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण मंत्रालयों में से एक बन गया है।

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मई 2014 में स्मृति ईरानी को तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लगभग दो वर्ष बाद जुलाई 2016 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया। इसके बाद प्रकाश जावड़ेकर ने मंत्रालय की कमान संभाली और करीब तीन वर्षों तक इस पद पर रहे।

मई 2019 में दूसरे कार्यकाल के दौरान रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को शिक्षा मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू हुई, लेकिन लगभग दो वर्ष बाद जुलाई 2021 में उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा।

इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति को लागू करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और कई परीक्षा सुधारों पर काम हुआ। हालांकि, इसी दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET-UG पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सरकार को तीखी आलोचना का सामना भी करना पड़ा। अंततः जुलाई 2026 में उन्होंने पद छोड़ दिया।

लगातार बदलते नेतृत्व ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या शिक्षा मंत्रालय देश के सबसे चुनौतीपूर्ण मंत्रालयों में से एक बन चुका है, जहां नीतिगत फैसलों के साथ-साथ करोड़ों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की अपेक्षाओं का संतुलन बनाए रखना आसान नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा मंत्रालय में बार-बार बदलाव से दीर्घकालिक योजनाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है। वहीं सरकार का पक्ष रहा है कि समय-समय पर परिस्थितियों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार मंत्रिमंडल में बदलाव करना सामान्य प्रक्रिया है।

हाल के घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर जनता की अपेक्षाएं पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय के सामने केवल नई नीतियां बनाना ही नहीं, बल्कि उन पर भरोसा कायम रखना भी बड़ी चुनौती है।

12 वर्षों में शिक्षा मंत्रियों का कार्यकाल

  • स्मृति ईरानी: मई 2014 – जुलाई 2016 (लगभग 2 वर्ष 1 माह)
  • प्रकाश जावड़ेकर: जुलाई 2016 – मई 2019 (करीब 3 वर्ष)
  • रमेश पोखरियाल ‘निशंक’: मई 2019 – जुलाई 2021 (लगभग 2 वर्ष 1 माह)
  • धर्मेंद्र प्रधान: जुलाई 2021 – जुलाई 2026 (5 वर्ष से अधिक)

आने वाले समय में शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे सौंपी जाती है और वह परीक्षा सुधार, नई शिक्षा नीति तथा छात्रों के भरोसे को किस तरह मजबूत करता है, इस पर पूरे देश की नजर रहेगी।

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