Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

उपनिबंधन कार्यालय में बेमियादी हड़ताल शुरू, निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का धरना
बस्ती, 18 जून 2026।
प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-रजिस्ट्री व्यवस्था और रजिस्ट्री लेखन कार्य को निजी कंपनी के माध्यम से संचालित किए जाने की प्रक्रिया के विरोध में गुरुवार को बस्ती उपनिबंधन कार्यालय परिसर में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं तथा अन्य सहयोगियों ने बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठ गए और शासन के फैसले के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
धरनारत अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का कहना है कि ई-रजिस्ट्री संबंधी शासनादेश से वर्षों से इस पेशे से जुड़े हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आरोप है कि यदि रजिस्ट्री लेखन कार्य निजी कंपनियों को सौंप दिया गया तो दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता, टाइपिस्ट और अन्य सहयोगी कर्मचारियों के रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
प्रदर्शनकारियों ने शासन से मांग की कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था से जुड़े विवादित शासनादेश को तत्काल वापस लिया जाए तथा रजिस्ट्री संबंधी समस्त कार्य सरकारी तंत्र के माध्यम से ही संचालित किए जाएं। उनका कहना है कि निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से आम जनता को अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों के साथ धोखाधड़ी और शोषण की आशंकाएं भी बढ़ सकती हैं।
धरने में शामिल अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आम नागरिक सीधे सरकारी कार्यालयों में अपना कार्य करवा सकता है, जबकि निजीकरण की स्थिति में पारदर्शिता प्रभावित होने का खतरा रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
हड़ताल के चलते उपनिबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री संबंधी कार्य प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। कार्यालय में आने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक शासन विवादित आदेश को वापस नहीं लेता, तब तक उनका बेमियादी धरना और हड़ताल जारी रहेगी।
इस दौरान अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। धरना स्थल पर पूरे दिन नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा।
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