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मुजफ्फरनगर में बंधुआ मजदूरी का बड़ा खुलासा, फैक्ट्री से 13 मजदूर मुक्त, दो आरोपी गिरफ्तार
मुजफ्फरनगर, 24 जून 2026।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में श्रम विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बंधुआ मजदूरी के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जिले की एक झोला निर्माण फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान 13 मजदूरों को मुक्त कराया गया, जिन्हें कथित रूप से पिछले करीब दो वर्षों से बंधक बनाकर रखा गया था। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि मामले का खुलासा तब हुआ जब फैक्ट्री में कैद एक मजदूर किसी तरह वहां से भाग निकलने में सफल हो गया। उसने स्थानीय पुलिस को पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद श्रम विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारकर मजदूरों को मुक्त कराया।
मुक्त कराए गए मजदूरों ने फैक्ट्री संचालकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों के अनुसार उन्हें बेहतर रोजगार और अच्छी तनख्वाह का लालच देकर विभिन्न राज्यों और नेपाल से यहां लाया गया था। फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए गए तथा बाहरी दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। मजदूरों का कहना है कि उन्हें परिवार वालों से बात तक नहीं करने दी जाती थी।
पीड़ितों ने बताया कि फैक्ट्री परिसर की सुरक्षा के लिए दो पिटबुल कुत्ते रखे गए थे, जिनका इस्तेमाल मजदूरों को डराने और भागने से रोकने के लिए किया जाता था। मजदूरों के अनुसार उन्हें नियमित मजदूरी नहीं दी जाती थी और खाने के नाम पर 24 घंटे में केवल एक बार सूखी रोटी दी जाती थी। विरोध करने या भागने की कोशिश करने वालों को लाठियों और कोड़ों से बेरहमी से पीटा जाता था। कई मजदूरों के शरीर पर मारपीट के निशान भी पाए गए हैं।
यही नहीं पिटबुल से कटवाने की धमकी भी दी जाती थी |
छापेमारी के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मारपीट में इस्तेमाल की जाने वाली लाठियां और अन्य सामान भी बरामद किया है। मुक्त कराए गए मजदूरों की पहचान रामू, विक्रम, नारायण, सीताराम, संतोष, शिवम जाटव, जगदीश, राजहंस, साहिल, रंजीत पासवान, दिलशाद, उज्ज्वल और सोनू चौहान के रूप में हुई है। ये मजदूर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों तथा पड़ोसी देश नेपाल से लाए गए थे।
पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं लंबे समय तक बंधक बनाकर रखे जाने के दौरान किसी मजदूर की मौत तो नहीं हुई। सभी मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित उनके घर भेजने की व्यवस्था की है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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