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बीबीसी की पड़ताल में बड़ा खुलासा: इंस्टाग्राम पर पैसों लेकर चल रहे थे बाल यौन शोषण सामग्री के विज्ञापन
नई दिल्ली। 03 जुलाई 2026।
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एक विस्तृत पड़ताल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम को लेकर बेहद गंभीर खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे भुगतान वाले विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे थे जिनके माध्यम से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री बेचने वाले टेलीग्राम चैनलों तक लोगों को पहुँचाया जा रहा था। बीबीसी का दावा है कि इन विज्ञापनों में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर यूज़र्स को टेलीग्राम के लिंक उपलब्ध कराए गए, जहाँ कथित तौर पर ऐसी सामग्री 99 रुपये जैसी मामूली कीमत पर बेची जा रही थी।
पड़ताल के दौरान बीबीसी ने पाया कि बिना किसी विशेष खोज के भी इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम नए अकाउंट को पहले यौन संकेतों वाली सामग्री और उसके बाद और अधिक गंभीर एवं आपत्तिजनक विज्ञापन दिखाने लगा। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ही दिनों में ऐसे विज्ञापन सामने आने लगे जिनमें नाबालिगों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री का प्रचार किया जा रहा था और साथ ही टेलीग्राम चैनलों के लिंक भी दिए गए थे।
बीबीसी ने ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, लेकिन 24 घंटे बाद कंपनी की ओर से जवाब मिला कि विज्ञापन उसकी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं करता। हालांकि बाद में बीबीसी द्वारा विस्तृत जानकारी साझा किए जाने के बाद मेटा ने कहा कि संबंधित विज्ञापन हटा दिए गए हैं, कई अकाउंट निलंबित कर दिए गए हैं तथा ऐसे कंटेंट से जुड़े कई यूआरएल भी ब्लॉक कर दिए गए हैं। कंपनी का कहना है कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं होता और वह लगातार नई तकनीकों के माध्यम से ऐसे अपराधों पर रोक लगाने का प्रयास कर रही है।
टेलीग्राम ने भी अपने जवाब में कहा कि वर्ष 2026 के दौरान उसने बाल यौन शोषण और हिंसक सामग्री से जुड़े लगभग 2.74 लाख ग्रुप और चैनल हटाए हैं। कंपनी के अनुसार, वह ऐसी सामग्री की पहचान और उसे हटाने के लिए तकनीकी प्रणालियों के साथ मानव मॉडरेटरों की भी सहायता ले रही है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकूर ने बीबीसी से बातचीत में इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापनों से कमाई हो रही है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इस पर सर्वोच्च न्यायालय तथा सरकार दोनों को संज्ञान लेना चाहिए। उनका कहना था कि सोशल मीडिया कंपनियाँ केवल तकनीकी मंच होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकतीं।
पूर्व फेसबुक उपाध्यक्ष ब्रायन बोलेंड ने भी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम का उद्देश्य उपयोगकर्ता को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना होता है और यदि उसकी पर्याप्त निगरानी नहीं की जाए तो ऐसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ सुरक्षा और राजस्व के बीच संतुलन बनाए रखना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
मेटा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि बच्चों का यौन शोषण एक जघन्य अपराध है और कंपनी इसके खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2025 में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल 40 लाख से अधिक अकाउंट हटाए गए तथा नई तकनीकों के माध्यम से ऐसे अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल सामग्री हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्क पर भी कठोर कार्रवाई करनी होगी ताकि बच्चों के विरुद्ध होने वाले इस गंभीर अपराध पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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समाचार स्रोत… BBC World Service