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बागपत में निकाह की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: अब स्टाम्प पेपर पर कानूनी शपथपत्र के बिना नहीं पढ़ाया जाएगा निकाह
बागपत, 11 जुलाई 2026।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में निकाह की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अब निकाह से पहले दूल्हा और दुल्हन पक्ष को अधिवक्ता द्वारा तैयार कराया गया स्टाम्प पेपर पर कानूनी शपथपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इस शपथपत्र के बिना कोई भी इमाम या मौलाना निकाह नहीं पढ़ाएगा। यह फैसला खिदमत सोसायटी और जमीअत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधियों की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
बड़ौत शहर की जामा मस्जिद में आयोजित बैठक में हाल के वर्षों में सामने आए कई विवादित मामलों पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि कई बार निकाह के बाद यह तथ्य सामने आए कि किसी पक्ष का पहले से विवाह था, अदालत में कोई वैवाहिक विवाद लंबित था या अन्य महत्वपूर्ण कानूनी जानकारियां छिपाई गई थीं। ऐसे मामलों के कारण निकाह पढ़ाने वाले इमामों को भी पुलिस जांच, कानूनी नोटिस और न्यायिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ा।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया कि निकाह से पहले दोनों पक्षों की ओर से अधिवक्ता द्वारा तैयार कराया गया स्टाम्प पेपर पर शपथपत्र दिया जाएगा। इस शपथपत्र में दोनों पक्ष यह घोषित करेंगे कि उन्होंने अपनी वैवाहिक स्थिति, कानूनी स्थिति और अन्य आवश्यक जानकारियां सही एवं पूर्ण रूप से दी हैं तथा कोई तथ्य नहीं छिपाया है। उलेमाओं का मानना है कि इससे भविष्य में धोखाधड़ी, विवाद और कानूनी जटिलताओं की संभावना काफी हद तक कम होगी और निकाह की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
खिदमत सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. इरफान मलिक ने बताया कि यह निर्णय किसी पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए नहीं, बल्कि निकाह पढ़ाने वाले इमामों और धार्मिक संस्थाओं को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि निकाह एक पवित्र धार्मिक अनुबंध है और इसमें सत्यता व पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि सभी आवश्यक जानकारियां पहले से लिखित रूप में उपलब्ध होंगी तो भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना काफी कम हो जाएगी।
डॉ. इरफान मलिक ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत 11 बिंदुओं वाला घोषणा पत्र तैयार किया जाएगा, जिसमें दोनों पक्षों को अपनी वैवाहिक, कानूनी और व्यक्तिगत स्थिति से संबंधित आवश्यक घोषणाएं करनी होंगी। यह घोषणा पत्र कानून और शरीयत दोनों के अनुरूप तैयार किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी दिक्कत उत्पन्न न हो।
शहर कारी एवं जमीअत उलेमा-ए-हिंद के शहर अध्यक्ष साबिर चौधरी ने कहा कि यह फैसला किसी नई बाधा को खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदार और कानून के अनुरूप निकाह व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी इमामों ने एकमत होकर निर्णय लिया है कि बिना शपथपत्र के कोई भी मौलाना निकाह नहीं पढ़ाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में कानूनी नोटिस दूल्हा-दुल्हन या उनके परिजनों की बजाय निकाह पढ़ाने वाले इमामों को भेजे जाते हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यदि कोई पक्ष आवश्यक शपथपत्र प्रस्तुत नहीं करेगा, तो उसका निकाह नहीं पढ़ाया जाएगा।
हालांकि, यह निर्णय स्थानीय धार्मिक संगठनों और इमामों द्वारा लिया गया है। फिलहाल यह कोई सरकारी आदेश या राज्यव्यापी नियम नहीं है, बल्कि संबंधित संगठनों की ओर से अपनाई जा रही स्थानीय व्यवस्था है।
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