दसिया एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर बस्ती में सियासी घमासान, विरोध प्रदर्शन के बीच छावनी बना इलाका- सांसद ने ज्ञापन दे शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करवाया धरना…….

Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

दसिया एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर बस्ती में सियासी घमासान, विरोध प्रदर्शन के बीच छावनी बना इलाका; बैरिकेडिंग पर भड़के सांसद और विधायक

बस्ती, 14 जुलाई 2026।
बस्ती के दसिया गांव में निर्माणाधीन एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के बीच माहौल पूरी तरह राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और विभिन्न किसान संगठनों द्वारा प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी। पूरे क्षेत्र में जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी गई, बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एक दिन पहले ही तैयारियां पूरी कर ली थीं। पूर्व में लागू धारा 144 के स्थान पर प्रभावी धारा 163 बीएनएसएस लागू कर दी गई थी। सोमवार को ही प्रशासनिक अधिकारियों और कई थानों की पुलिस ने क्षेत्र में पैदल मार्च कर लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की थी।

मंगलवार को विरोध प्रदर्शन में स्थानीय ग्रामीणों के साथ कई किसान संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। इसी दौरान समाजवादी पार्टी के बस्ती सांसद राम प्रसाद चौधरी तथा रुधौली विधायक राजेन्द्र चौधरी भी प्रदर्शन स्थल की ओर रवाना हुए, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें दसिया मोड़ पर बैरिकेडिंग लगाकर आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद दोनों नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध जताया।

सांसद राम प्रसाद चौधरी ने कहा कि जनता की समस्याओं को सुनने और उनके बीच जाने से जनप्रतिनिधियों को रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है। उन्होंने कहा कि “जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। औद्योगिकीकरण और विकास के नाम पर भोली-भाली जनता का शोषण तथा उनके अधिकारों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है। सांसद ने वरिष्ठ अधिकारियों को मांगपत्र और ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि किसी भी परियोजना में स्थानीय किसानों की सहमति, पर्यावरण संरक्षण और आम जनता के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा पूरे विवाद का निष्पक्ष और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जाएगा।

उन्होंने इसके विरोध में उप जिलाधिकारी भानपुर शत्रुघ्न पाठक को ज्ञापन देकर धरने को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करवाया|

वहीं रुधौली विधायक राजेन्द्र चौधरी ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि एथेनॉल फैक्ट्री से किसानों और क्षेत्रवासियों को नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा विधानसभा में प्रमुखता से उठाया जाएगा। विधायक ने यह भी बयान दिया कि यदि भविष्य में उनकी सरकार बनी तो इस फैक्ट्री को बंद कराने का प्रयास किया जाएगा।

विरोध कर रहे ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि जब जमीन अधिग्रहित की गई थी तब उन्हें बताया गया था कि यहां सरिया फैक्ट्री स्थापित होगी। बाद में बियर फैक्ट्री की बात सामने आई और अब एथेनॉल फैक्ट्री का निर्माण किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस परियोजना से भूजल और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र का पानी प्रदूषित होने की आशंका है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो पानी न तो पीने योग्य रहेगा और न ही खेती या अन्य उपयोग के लायक। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सरकार पर भी आरोप लगाए और परियोजना को लेकर नाराजगी व्यक्त की।

दूसरी ओर फैक्ट्री प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज किया है। प्रबंधन का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के समय से ही परियोजना को डिस्टिलरी परियोजना बताया गया था और इस तथ्य को कभी छिपाया नहीं गया। उनका कहना है कि डिस्टिलरी शब्द से स्पष्ट है कि वहां एथेनॉल अथवा संबंधित उत्पादों का निर्माण किया जा सकता है। प्रबंधन के अनुसार फैक्ट्री का निर्माण सभी पर्यावरणीय मानकों और ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है तथा प्रदूषण फैलने की आशंका निराधार है। उनका यह भी कहना है कि जब परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है तब इस प्रकार का विरोध उचित नहीं है।

वहीं क्षेत्र के कुछ लोगों का मानना है कि यह पूरा मामला अब केवल औद्योगिक परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। स्थानीय स्तर पर इस विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है और विभिन्न दल अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि फैक्ट्री के विरोध में स्थानीय स्तर पर भाजपा से जुड़े कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा भी असहमति जताए जाने की चर्चाएं हैं।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और व्यापक बैरिकेडिंग के कारण प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पूरी तरह अपने निर्धारित स्वरूप में नहीं हो सका। हालांकि जो प्रदर्शन हुआ, वह पुलिस की निगरानी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। अब इस पूरे मामले में सभी की निगाहें प्रशासन, फैक्ट्री प्रबंधन और आंदोलनकारी किसानों के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बातचीत से समाधान निकलता है या यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा कानूनी रूप लेता है।

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