Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

साइबर ठगी का खुलासा: राजस्थान से जुड़े साइबर नेटवर्क के तार, बस्ती साइबर क्राइम पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा, 50,950 रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा
बस्ती, 14 जुलाई 2026।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने साइबर मुख्यालय लखनऊ द्वारा संचालित साइबर वज्र अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम ऐसे बैंक खातों के माध्यम से भेजी गई थी, जिनके साइबर अपराध से जुड़े होने के कारण खातों पर होल्ड लगाया गया था। पुलिस की जांच में इस पूरे नेटवर्क के तार राजस्थान तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं, जिसके आधार पर साइबर क्राइम थाना अब पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। पुलिस फरार आरोपी सहित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में विकास चौधरी उर्फ कार्तिक पुत्र राम प्यारे चौधरी निवासी माधवापुर थाना सोनहा, राज यादव पुत्र घनश्याम यादव निवासी वंजरिया थाना सोनहा तथा महेन्द्र चौधरी उर्फ सत्या पुत्र राजेन्द्र प्रसाद निवासी बनकटवा थाना सोनहा शामिल हैं। तीनों को मंगलवार सुबह लगभग 9:45 बजे अमहट पुल से फोरलेन जाने वाली सड़क पर अमहट पुल से करीब 200 मीटर आगे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन, दो मोहर तथा 1,000 रुपये नकद बरामद किए हैं।
क्षेत्राधिकारी सदर सतेंद्र भूषण त्रिपाठी ने बताया कि यह पूरा मामला संदीप वर्मा की शिकायत पर दर्ज किया गया। संदीप वर्मा ग्राम आमा, पोस्ट जिनवा के निवासी हैं और जिनवा चौराहे पर जन सेवा केंद्र (सीएसपी) संचालित करते हैं। शिकायत में उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल 2026 को दो युवक उनकी दुकान पर पहुंचे और अपनी मां के इलाज की मजबूरी बताते हुए उनके बिजनेस क्यूआर कोड पर 20,400 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर नकद राशि ले गए। इसके दो दिन बाद 27 अप्रैल 2026 को दो अन्य युवक अपने परिजन के इलाज का हवाला देकर 30,550 रुपये ऑनलाइन भेजकर नकद राशि ले गए।
कुछ समय बाद जब संबंधित रकम पर बैंक द्वारा होल्ड लगाया गया तो संदीप वर्मा को धोखाधड़ी की आशंका हुई। उन्होंने अपनी दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और आसपास के लोगों की मदद से चारों युवकों की पहचान कराई। इसके बाद साइबर क्राइम थाना बस्ती में मु0अ0सं0-17/2026 के तहत धारा 319(2), 318(4) बीएनएस तथा 66-डी आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि चौथा आरोपी अभिजीत शर्मा अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को शिकायतकर्ता के सीएसपी के बिजनेस क्यूआर कोड पर ट्रांसफर कराया और बदले में कुल 50,950 रुपये नकद प्राप्त कर लिए। इसके बाद तीनों ने वह रकम आपस में बांट ली और खर्च कर दी।
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन खातों से भुगतान किया गया था, वे पहले से साइबर अपराध के दायरे में थे। इसी कारण संबंधित धनराशि पर बैंक ने होल्ड लगाया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन खातों से आई, उनके वास्तविक संचालक कौन हैं तथा राजस्थान से संचालित साइबर नेटवर्क के साथ इन आरोपियों का क्या संबंध है। साइबर विशेषज्ञ डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन जांच कर रहे हैं।
इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम राम कुमार राजभर, निरीक्षक भगवान सिंह, हेड कांस्टेबल अंगद मौर्या, हेड कांस्टेबल ऋषिवेद तिवारी, हेड कांस्टेबल पवन कुमार यादव तथा कांस्टेबल अशोक चौहान की टीम शामिल रही।
क्षेत्राधिकारी सदर ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और साइबर ठगी से जुड़े इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान कर जल्द ही उनके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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