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‘सर तन से जुदा’ की तुलना ‘जय श्री राम’ से नहीं हो सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज की
प्रयागराज, 08 सितंबर 2026।
बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे की तुलना ‘जय श्री राम’, ‘अल्लाहु अकबर’, ‘सत श्री अकाल’ और ‘हर हर महादेव’ जैसे धार्मिक उद्घोषों से करने से इनकार किया।
अदालत ने टिप्पणी की कि धार्मिक उद्घोष ईश्वर या गुरु के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त करते हैं, जबकि ‘सर तन से जुदा’ जैसा नारा कानून के शासन और देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाला है तथा हिंसक विद्रोह के लिए उकसाने की क्षमता रखता है।
कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अथवा धर्म के नाम पर ऐसे कथित नारे को संरक्षण नहीं दिया जा सकता, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने या हिंसा भड़कने का खतरा हो।
यह मामला 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई हिंसा से जुड़ा है। हिंसा के मामले में मौलाना तौकीर रजा खान को मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया था। जमानत के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष मामले की गंभीरता और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विचार किया गया।
हाईकोर्ट ने परिस्थितियों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद तौकीर रजा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
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