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मां की मौत पर IPS आशुतोष मिश्रा का गुस्सा, बोले- ‘न पुलिस की रिपोर्ट देखी, न मेरे घर आए, फिर भी चला रहे हैं झूठी खबर’
अंबेडकर नगर | 19 अगस्त 2026
IPS अधिकारी आशुतोष मिश्रा अपनी मां की मौत के मामले में सामने आ रही मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर खासे नाराज हैं। उन्होंने कुछ चैनलों की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना पुलिस की रिपोर्ट देखे और बिना परिवार से बात किए जिस तरह से खबरें चलाई जा रही हैं, वह बेहद गंभीर मामला है।
मिश्रा का कहना है कि उनकी मां की मौत को लेकर वास्तविक तथ्यों की जानकारी किए बिना कुछ चैनल यह दावा कर रहे हैं कि हत्या और लूट की कहानी गलत है तथा लूटे गए जेवरात बरामद हो चुके हैं। उन्होंने ऐसी रिपोर्टिंग पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “न पुलिस की रिपोर्ट है इनके पास। न मेरे घर आकर पूछे। और चला रहे हैं कि जवाहरात बरामद हो गए।”
मां की मौत और जेवरात गायब होने का मामला
दरअसल, IPS आशुतोष मिश्रा की मां इंद्रावती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामला सुर्खियों में आया था। शुरुआती रिपोर्टों में उनके शरीर से जेवरात गायब होने और परिस्थितियों को लेकर संदेह जताया गया था। मामले में फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम भी कराया गया।
हालांकि, बाद की रिपोर्टों में पोस्टमार्टम के हवाले से मौत को प्राकृतिक/हृदयाघात से जोड़कर भी बताया गया है। इसी वजह से मामले की परिस्थितियों और पुलिस की जांच को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
यही विरोधाभासी दावे अब विवाद का विषय बन गए हैं। आशुतोष मिश्रा का कहना है कि जिस निष्कर्ष को कुछ मीडिया संस्थान अंतिम सत्य की तरह पेश कर रहे हैं, उसके पीछे न तो परिवार से बातचीत है और न ही ऐसी पुलिस रिपोर्ट, जिसका हवाला देकर यह दावा किया जा सके।
पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
IPS आशुतोष मिश्रा ने अंबेडकर नगर की पुलिस कप्तान प्राची सिंह के कथित बयानों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पुलिस की ओर से खुलासा होने और लूटा गया सामान बरामद होने की बात कही जा रही है, जबकि उनके अनुसार ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
उन्होंने मीडिया की उस कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा किया, जिसमें बिना स्वतंत्र सत्यापन के किसी स्रोत से मिली जानकारी को तत्काल खबर के रूप में प्रसारित कर दिया जाता है।
“ये सुधर जाएं तो देश सुधर जाएगा”
मीडिया रिपोर्टिंग पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए आशुतोष मिश्रा ने कुछ चैनलों को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “ये सुधर जाएं तो देश सुधर जाएगा।”
उनकी नाराजगी केवल एक खबर या एक चैनल तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि सवाल उस पत्रकारिता पर भी है जिसमें संवेदनशील और गंभीर मामले में तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना निष्कर्ष सामने रख दिए जाते हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि हत्या, लूट और बरामदगी को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी मौत के कारण को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं।
अगर एक IPS अधिकारी को भी अपनी बात रखने के लिए लड़ना पड़े तो आम आदमी का क्या?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को अपनी ही मां की मौत के मामले में सामने आ रही रिपोर्टिंग पर सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़े और यह कहना पड़े कि “न पुलिस की रिपोर्ट है इनके पास, न मेरे घर आकर पूछा”, तो आम नागरिक के सामने क्या स्थिति होगी?
यही इस विवाद का सबसे बड़ा सवाल है—अगर सिस्टम और मीडिया के सामने अपनी बात रखने में एक IPS अधिकारी को भी संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम आदमी अपनी आवाज आखिर किसके सामने और कैसे रखेगा?
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