
जी.पी. दुबे
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NGV PRAKASH NEWS
उत्तर प्रदेश में भाजपा के हार के व सपा के जीत के प्रमुख कारण
लोकसभा चुनाव 2024 संपन्न हो चुका है 9 जून को एनडीए की सरकार बनने जा रहे हैं और नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे |
जहां भाजपा बहुमत से 33 सीट पीछे रह गई उसमें बहुत कुछ योगदान उत्तर प्रदेश का है |
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन ना करते हुए मात्र 33 सीटों पर ही सिमट गई |
उत्तर प्रदेश में भाजपा के हर तथा समाजवादी पार्टी एलायंस के जीत बहुत विश्लेषण आ चुके हैं लेकिन मेरी नजर में भाजपा के हार तथा सपा की जीत के प्रमुख कारण निम्नवत हैं….
👉🏿 10 सालों से लगातार सांसद रहे अधिकांश उम्मीदवार 2019 के बाद अपने क्षेत्र में लगभग निष्क्रिय रहे और चुनाव की घोषणा के बाद ही उन्होंने सक्रियता दिखाई… वहीं समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता काफी पहले से ही क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे थे..
👉🏿 भाजपा उम्मीदवारों द्वारा क्षेत्र विशेष में ही प्रचार किया गया जिसमें उनके क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं की अपेक्षा की गई.. वहीं सपा के प्रचार के लिए उनके उम्मीदवार कार्यकर्ता तथा उनके मतदाताओं जैसे यादव तथा अल्पसंख्यकों नें भी एक-एक वोट सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई..
👉🏿 संविधान बदलने जैसे भाषणों को जब इंडिया गठबंधन ने अपना मुद्दा बना लिया और इंडिया गठबंधन तमाम कार्यकर्ताओं ने ओबीसी तथा दलितों को या समझना चालू कर दिया की संविधान समाप्त हो जाएगा पहले इसे बचाओ और वह इसे समझने में सफल भी रहे.. वहीं भाजपा के उम्मीदवार सहित कोई भी कार्यकर्ताओं ने इस बारे में कुछ भी बोलने से लगभग परहेज किया…
👉🏿 इंडिया गठबंधन के घटक कांग्रेस द्वारा जब हर परिवार की एक महिला को 8500 प्रति माह देने के लिए गारंटी कार्ड बाटे जा रहे थे और महिलाओं को लगा कि अब उनके खाते में 1लाख सालाना आ जाया करेगा तो उन्होंने एकजुट होकर इंडिया गठबंधन को वोट किया… वहीं भाजपा गैस जैसे मुद्दे पर महंगाई से झूझती रही तथा वह कांग्रेस के गारंटी कार्ड का कोई काट नहीं निकल पाई..
👉🏿 भारतीय जनता पार्टी नें उम्मीदवारों की घोषणा काफी पहले कर दी परंतु केंद्रीय नेतृत्व द्वारा यह नहीं पता किया गया कि क्षेत्र में लोगों का उनके प्रति नजरिया क्या है…. वही उत्तर प्रदेश जैसे जातिगत खेमे में बाटे मतदाताओं के बीच इंडिया गठबंधन खास कर समाजवादी पार्टी ने काफी सोच समझकर प्रत्याशी उतारे..
👉🏿 भाजपा प्रत्याशी मोदी के जादू के सहारे बैठे रहे.. वहीं समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी तथा कार्यकर्ता डोर टू डोर मतदाताओं को समझते रहे..
👉🏿 10 साल से सीटिंग सांसदों ने अपनी इर्द-गिर्द चापलूसों की फौज खड़ी कर ली और पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं की अपेक्षा करना चालू कर दिया. अपनी उपेक्षा से नाराज कार्यकर्ताओं द्वारा मतदाताओं को बूथ तक लाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई… वही सपा कार्यकर्ताओं ने एक एक वोट सहेजा..
👉🏿 आरएसएस द्वारा इस चुनाव में न्यूट्रल रहने का भी बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा.. क्योंकि एक-एक वोट को सहेजने के लिए आरएसएस के कार्यकर्ता अपना की जान लगा देते थे..
👉🏿 अति आत्मविश्वास के चलते अपनी जीत को पक्की मानकर चल रहे प्रत्याशियों द्वारा जनता के मूड को नहीं समझ पाए..
👉🏿 महंगाई,बेरोजगारी, चुनाव के समय पेपर का लीक होना जहां भाजपा के लिए नकारात्मक माहौल बना रहा था… वहीं समाजवादी पार्टी ने इसको मुद्दा बना दिया…
👉🏿 केंद्रीय नेतृत्व ने जहां कुछ बड़े समाचार पत्रों,टीवी चैनलों को अपने पक्ष में कर लिया और वही काम उम्मीदवारों द्वारा अपने लोकसभा क्षेत्र में किया गया.. परंतु केंद्रीय नेतृत्व तथा उम्मीदवार या भूल गए की छोटे-छोटे समाचार पत्र, न्यूज़ पोर्टल तथा यूट्यूबर भी हैं.. जिनकी पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े न्यूज़ चैनलों से ज्यादा है.. और उन्होंने जमकर बीजेपी के खिलाफ माहौल तैयार किया..
मतलब छोटे समाचार पत्रों, चैनलों, न्यूज़ पोर्टल तथा यूट्यूबरों को नजर अंदाज करना बीजेपी के हार का एक बड़ा कारण बना…
👉🏿 भाजपा नेतृत्व द्वारा बार-बार राशन देने की बात भी लोगों के अहम को ठेस पहुंचा रही थी..
साथ ही शहजादे तथा परिवार बाद, घमंडिया गठबंधन जैसे शब्दों को हर भाषण में हाईलाइट करना भी भाजपा के लिए नुकसानदायक हुआ और उनके सलाहकार यह नहीं समझ पाए की ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से लोगों के बीच में गलत असर पड़ेगा…
इसका असर यह हुआ की जनता समझ बैठी कि भाजपा सरकार पूरी तरह तानाशाह हो गई है और इसे बदलना जरूरी है
साथी दलितों के दिमाग में अगर कर गया कि अगर इस बार भाजपा सरकार बनी तो वह बाबा साहेब की बनाए हुए संविधान को समाप्त कर देगी, आरक्षण समाप्त कर देगी, जिसके वजह से संविधान बचाने के लिए उन्होंने मतदान ना चाहते हुए भी सपा और इंडिया गठबंधन पक्ष कर दिया
👉🏿 साथी भाजपा के मध्यम वर्गीय परंपरागत वोट भी न्यूट्रल हो गए..
👉🏿 पूरे चुनाव भर भाजपा अपनों से ही जूझती रही और उनको मैनेज करती रह गई.. जिसका उसे नुकसान उठाना पड़ा..
