पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रताप सिंह आत्महत्या मामले का खुलासा: हनी ट्रैप में फंसा कर ब्लैकमेल करने वाले तीन गिरफ्तार…….

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पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह आत्महत्या मामला: हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने वाले तीन गिरफ्तार, एक करोड़ रुपये की मांग का खुलासा

बस्ती, 6 सितंबर 2026। वाल्टरगंज के पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के आरोप में एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूर्व थानाध्यक्ष को हनीट्रैप में फंसाकर उनका वीडियो तैयार किया और फिर उसे भेजकर ब्लैकमेल किया। डीआईजी संजीव त्यागी ने खुलासा करते हुए बताया कि सूर्य प्रकाश सिंह से करीब एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी।

मामले का खुलासा करते हुए डीआईजी संजीव त्यागी ने पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक श्याम कांत की मौजूदगी में बताया कि जांच में हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग और धन उगाही से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का एक सुनियोजित समूह था, जो कथित तौर पर पैसे वाले लोगों को हनीट्रैप में फंसाकर उनके वीडियो-ऑडियो तैयार करता और बाद में व्हाट्सऐप, वीडियो कॉल तथा चैटिंग के जरिए ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूलता था।

महिला के जरिए हनीट्रैप में फंसाने का आरोप

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार प्रियंका चौधरी ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटर में काम करती रही है। आरोप है कि वह पैसे वाले लोगों को अपने मोहजाल में फंसाकर उनके वीडियो और ऑडियो तैयार करती थी। इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल, व्हाट्सऐप और चैटिंग के जरिए ब्लैकमेल किया जाता था।

पुलिस का दावा है कि ब्लैकमेलिंग के दौरान महिला वीडियो कॉल पर अपने हाथ की नस काटकर खून निकलता हुआ दिखाकर पीड़ितों को भावनात्मक रूप से भयभीत भी करती थी और इसके बाद मोटी रकम की मांग की जाती थी। इस काम में उसके पिता रामनयन चौधरी और विजय प्रकाश भी सहयोग करते थे।

जांच में पुलिस को अब तक चार लोगों को हनीट्रैप में फंसाकर धन उगाही किए जाने के तथ्य मिले हैं। इनमें डॉ. उमेश से चार लाख रुपये, अहमद रजा से पांच लाख रुपये और मध्य प्रदेश निवासी आर्यन दीक्षित उर्फ जितेंद्र दीक्षित से 15 लाख रुपये की कथित वसूली का पुलिस ने उल्लेख किया है। वहीं, पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह को भी इसी गिरोह के जाल में फंसाए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, ऐसे अन्य लोगों के संबंध में भी जांच जारी है।

हनीट्रैप के पैसों से खरीदी बोलेरो

पुलिस के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले हनीट्रैप के जरिए लोगों से पैसे वसूलकर प्रियंका चौधरी ने बोलेरो वाहन खरीदा था। पुलिस ने इसी वाहन को बरामद किया है। पुलिस का यह भी कहना है कि बोलेरो के चालक अहमद रजा को बाद में हनीट्रैप के माध्यम से ब्लैकमेल कर धन उगाही की गई।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जिस मकान में प्रियंका और उसका पिता किराए पर रहते थे, उसके मकान मालिक डॉ. उमेश को भी कथित तौर पर हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल किया गया था।

आत्महत्या से पहले हुई थी अंतिम फोन कॉल

पुलिस के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण में पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह का संपर्क प्रियंका चौधरी और उसके साथी विजय प्रकाश से स्थापित होने की पुष्टि हुई है। घटना वाले दिन के कॉलिंग पैटर्न ने भी जांच को महत्वपूर्ण आधार दिया।

पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन दोपहर 1:41 बजे विजय प्रकाश ने सूर्य प्रकाश सिंह को अंतिम फोन कॉल की थी। पुलिस का दावा है कि हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़ी प्रताड़ना से परेशान होकर सूर्य प्रकाश सिंह ने अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

29 अगस्त को सरकारी आवास में मिला था शव

वाल्टरगंज के पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त 2026 को बस्ती कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद उनके पुत्र संदीप सिंह की तहरीर पर 5 सितंबर को कोतवाली बस्ती में तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 387/2026, धारा 108 और 3(5) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस ने रविवार 6 सितंबर को सुबह 7:55 बजे सदर अस्पताल के सामने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

बोलेरो और तीन मोबाइल बरामद

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रियंका चौधरी पत्नी महेन्द्र चौधरी, रामनयन चौधरी पुत्र संपत चौधरी निवासी गंधार थाना वाल्टरगंज और विजय प्रकाश पुत्र भरतराम निवासी पिपरा काजी थाना पैकोलिया के रूप में हुई है।

पुलिस ने इनके कब्जे से बोलेरो वाहन संख्या UP51BN 5805 और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, वीडियो, चैटिंग और पैसों के लेनदेन समेत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है। मामले में अन्य संभावित पीड़ितों और आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है।

गिरफ्तार तीनों आरोपियों को विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

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