Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

फोन पे पर नाम सर्च कर क्राइम ब्रांच का डर दिखाकर ठगी करने वाले दो साइबर अपराधी गिरफ्तार
बस्ती, 08 सितंबर 2026।
साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे CY-VAJRA अभियान के तहत साइबर क्राइम थाना बस्ती पुलिस ने फोन पे और गूगल पे पर मोबाइल नंबर का नाम पता कर लोगों को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर डराने और मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आदित्य गुप्ता (28) निवासी दक्षिण दरवाजा, थाना पुरानी बस्ती, बस्ती और मूल निवासी मस्कनवा बाजार, थाना छपिया, गोंडा तथा अजय सिंह चौहान (24) निवासी कंचनपुर, थाना गुजैनी, कानपुर नगर और मूल निवासी भौसाना, थाना चौबेपुर, कानपुर देहात के रूप में हुई है।
साइबर क्राइम थाना बस्ती में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 21/2026, धारा 319(2), 318(4), 308(2), 61(2), 317(2) बीएनएस तथा 66सी, 66डी आईटी एक्ट के तहत पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने साइबर अपराध से जुड़े कई मामलों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।
दो साल से साइबर ठगी में शामिल होने का दावा
पुलिस के मुताबिक आरोपी आदित्य गुप्ता ने पूछताछ में बताया कि वह करीब दो वर्षों से साइबर अपराध कर रहा था। उसने अपने परिचितों के नाम पर कई बैंक खाते और उनसे जुड़े सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे। साइबर अपराध से आने वाली रकम में से वह करीब 30 प्रतिशत हिस्सा लेता था। रकम को एटीएम से निकालने के अलावा साथियों द्वारा बताए गए खातों में भी ट्रांसफर किया जाता था।
आरोपी के मुताबिक एक मामले में अजय सिंह और उसके साथियों ने कॉल कर पीड़ित को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने और मुकदमे में फंसाने का डर दिखाया तथा उससे 11 हजार रुपये की ठगी की।
फोन पे पर नंबर डालकर तलाशते थे पीड़ित
पूछताछ में आरोपियों ने ठगी का तरीका भी बताया। वे फोन पे या गूगल पे पर किसी मोबाइल नंबर को डालकर उससे जुड़े व्यक्ति का नाम पता करते थे। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को फोन कर खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते थे।
आरोपी पीड़ित से कहते थे कि उसके खिलाफ 42 पन्नों की सीडीआर मिली है और वह अश्लील वीडियो देखने के मामले में फंस गया है। इसके बाद केस दर्ज होने और गिरफ्तारी का भय दिखाकर उससे पैसे की मांग की जाती थी।
पुलिस के अनुसार आरोपी पीड़ित को यह भी कहते थे कि कोर्ट के माध्यम से मामला खत्म कराने में करीब चार लाख रुपये, जबकि थाने स्तर पर मामला खत्म कराने के लिए 15 हजार रुपये देने होंगे। डर के कारण पीड़ित उनके बताए यूपीआई या बैंक खाते में रकम भेज देता था। इसके बाद आरोपियों को जब पता चलता कि पीड़ित के खाते में और रकम है, तो वे वॉयस चेंजर का इस्तेमाल कर खुद को किसी वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश करते और केस हाईलाइट होने का डर दिखाकर लगातार और पैसे मांगते थे। इस तरह पीड़ित का खाता खाली करने की कोशिश की जाती थी।
आरोपियों के पास से बरामदगी
आदित्य गुप्ता के कब्जे से एक रियलमी मोबाइल फोन, चेकबुक, दो एटीएम कार्ड, पासबुक और 1,500 रुपये नकद बरामद हुए।
वहीं अजय सिंह के पास से दो मल्टीमीडिया मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, एक चेकबुक, एक पासबुक, दो एटीएम कार्ड और 2,500 रुपये नकद बरामद किए गए।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक बस्ती डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामाकांत के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी साइबर कुलदीप यादव के नेतृत्व में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय नारायण मिश्रा एवं उनकी टीम ने की।
पुलिस की अपील
पुलिस अधीक्षक बस्ती ने लोगों से साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी या अन्य गोपनीय विवरण साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद भी ठगी गई धनराशि वापस कराने की कार्रवाई संभव है।
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