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सांकेतिक चित्र
खेतों में सिंचाई के लिए बिछे बिजली के तार बन रहे जानलेवा, लालगंज में करंट की चपेट में आकर बुजुर्ग गंभीर
बस्ती, 19 सितंबर 2026।
खेतों की सिंचाई के लिए बिजली के ट्रांसफार्मर से मोटर तक बिछाए जाने वाले खुले और अस्थायी तार अब ग्रामीण इलाकों में हादसों का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। सड़क, चकरोड और खेतों के बीच से गुजरने वाले इन तारों के जोड़ कई बार खुल जाते हैं या जमीन पर पड़े तार रगड़ खाने से कट जाते हैं। ऐसी स्थिति में आसपास से गुजरने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। बावजूद इसके कई स्थानों पर न तो विद्युत विभाग की प्रभावी निगरानी दिखाई देती है और न ही प्रशासन की ओर से ऐसे खतरनाक तारों को लेकर नियमित कार्रवाई होती है। अक्सर कार्रवाई तब होती है, जब कोई बड़ा हादसा सामने आ जाता है।
घास काटने गए 58 वर्षीय बुजुर्ग करंट की चपेट में आए
ऐसा ही एक मामला लालगंज थाना क्षेत्र के बैजीपुर गांव में सामने आया, जहां घास काटने गए 58 वर्षीय भजन लाल गुप्ता पुत्र रामदेव गुप्ता खेत में बिछे बिजली के तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए।
बताया जा रहा है कि भजन लाल गुप्ता घास काटने के लिए गए थे। इसी दौरान खेत में सिंचाई के लिए बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आ गए। करंट लगते ही वह गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद आसपास मौजूद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों ने पहुंचाया अस्पताल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने आनन-फानन में घायल भजन लाल गुप्ता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनकटी पहुंचाया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार करने के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें कैली अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
परिजनों के मुताबिक खेत में सिंचाई के लिए मोटर चलाने के उद्देश्य से बिजली का तार बिछाया गया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि सिंचाई के लिए बिजली का तार बिछाया गया था और इसी तार की चपेट में आने से बुजुर्ग हादसे का शिकार हुए।
सड़क से खेत तक बिछे तारों की निगरानी कौन करेगा?
ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए ट्रांसफार्मर या अन्य विद्युत स्रोत से मोटर तक अस्थायी रूप से तार खींचने की व्यवस्था कई जगह देखने को मिलती है। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब यही तार सड़क, रास्ते या खेतों के बीच जमीन पर पड़े रहते हैं। तारों के जोड़ खुले होने, इंसुलेशन कटने या जमीन पर रगड़ खाने से करंट फैलने का खतरा बना रहता है।
ऐसे तार यदि किसी व्यक्ति के पैर के संपर्क में आ जाएं या बारिश और नमी के कारण जमीन में करंट फैल जाए तो गंभीर हादसा हो सकता है। पशुओं के लिए भी यह व्यवस्था बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
हादसे के बाद उठे विद्युत विभाग की निगरानी पर सवाल
बैजीपुर की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि गांवों में इस तरह खुले और असुरक्षित तरीके से बिछाए गए विद्युत तारों की निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे खतरनाक तारों की जांच और उन्हें सुरक्षित कराने की कार्रवाई हो तो हादसों को रोका जा सकता है।
फिलहाल बुजुर्ग का अस्पताल में उपचार चल रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों में भी खेतों और रास्तों में खुले बिजली के तारों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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