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अयोध्या जिला अस्पताल में लावारिस मरीज को फर्श पर घसीटने का वीडियो वायरल, अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
वायरल वीडियो में जमीन पर घसीटकर ले जाते दिखा मरीज
अयोध्या, 6 अक्टूबर 2026.
अयोध्या के जिला चिकित्सालय से सामने आए एक वायरल वीडियो ने अस्पताल में लावारिस मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में लावारिस वार्ड के एक मरीज को एक व्यक्ति द्वारा जमीन पर घसीटकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और अस्पताल में मरीजों की देखभाल को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा मरीज चलने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा है। उसे किसी स्ट्रेचर या व्हीलचेयर के बजाय जमीन पर घसीटकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, वीडियो से यह स्पष्ट नहीं होता कि घटना के समय स्ट्रेचर या व्हीलचेयर उपलब्ध थी या नहीं और मरीज को इस तरह ले जाने की वास्तविक वजह क्या थी। इसलिए इन पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
वायरल वीडियो के बाद उठे सवाल
वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल में भर्ती लावारिस मरीजों की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि किसी भी मरीज को अस्पताल परिसर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते समय उसकी सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
विशेष रूप से ऐसे मरीज जिनके साथ कोई परिजन या तीमारदार मौजूद नहीं होता, उनकी देखभाल की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और संबंधित कर्मचारियों पर और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। वायरल वीडियो ने इसी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
अयोध्या जिला अस्पताल में पहले भी सामने आ चुके हैं लावारिस मरीजों से जुड़े मामले
अयोध्या जिला अस्पताल में लावारिस मरीजों की व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। फरवरी 2026 में एक बेसहारा मरीज को भर्ती कराने के लिए समाजसेवी को अस्पताल के बाहर धरने पर बैठना पड़ा था। उस मामले में अस्पताल प्रशासन ने बाद में मरीज को भर्ती कर उपचार शुरू कराया था।
एक अन्य रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि जिला अस्पताल में लावारिस मरीजों के लिए अलग विशेष वार्ड की व्यवस्था नहीं है और ऐसे मरीजों को सामान्य वार्ड में भर्ती किए जाने की बात अस्पताल प्रशासन ने कही थी।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी सच्चाई
वर्तमान वायरल वीडियो को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मरीज को जमीन पर घसीटकर क्यों ले जाया गया और उस समय अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। इन सवालों का स्पष्ट जवाब अस्पताल प्रशासन की जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही सामने आ सकेगा।
फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्ट में वीडियो की घटना की पुष्टि हुई है, लेकिन मरीज की पहचान, वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि, घटना के समय मौजूद कर्मचारी और जिम्मेदारी तय होने संबंधी कोई आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसलिए मामले में किसी व्यक्ति या कर्मचारी को दोषी ठहराने से पहले आधिकारिक जांच का इंतजार करना उचित होगा।
वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि अस्पतालों में बेसहारा और लावारिस मरीजों के लिए इलाज के साथ-साथ उनकी देखभाल और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
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