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11 साल में दिल्ली से 5,559 बच्चे लापता, 695 का अब तक नहीं मिला सुराग
नई दिल्ली, 01 अप्रैल 2026.
📍राजधानी दिल्ली में मानव तस्करी और लापता बच्चों का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। दिल्ली पुलिस के जिपनेट आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 से 2025 के बीच 18 वर्ष तक के 5,559 बच्चे और किशोर लापता हुए, जिनमें से 4,864 को पुलिस ने ढूंढ लिया, जबकि 695 बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
📍यदि सभी आयु वर्ग के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन 11 वर्षों में दिल्ली से कुल 2,55,432 लोग लापता हुए, जिनमें से 2,01,455 लोगों को पुलिस ने बरामद कर लिया, लेकिन 53,977 लोग अब भी लापता हैं। औसतन देखा जाए तो इस अवधि में हर दिन करीब 63 लोग दिल्ली से गायब हुए, जो बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
📍मानव तस्करी के मामलों में भी राजधानी की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ के अनुसार 1 अप्रैल 2023 से 29 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली में ट्रैफिकिंग के शिकार 6,759 नाबालिगों को मुक्त कराया गया। इनमें 2,134 लड़कियां और 3,281 लड़के शामिल हैं। इस दौरान 2,407 मानव तस्करी के मामले दर्ज किए गए। ये बच्चे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से लाए गए थे।
📍संस्था के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत के मुताबिक देशभर में स्थिति और भी चिंताजनक है। इसी अवधि में 1,25,408 बच्चों को मानव तस्करी के चंगुल से छुड़ाया गया और 56,459 मामले दर्ज किए गए। इन बच्चों को लालच, धोखे और धमकी के जरिए गिरोहों के जाल में फंसाया गया था।
लापता बच्चों के मामलों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने 22 अप्रैल 2022 को एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू किया है। इसके तहत किसी भी बच्चे के लापता होने पर तुरंत केस दर्ज करना अनिवार्य है और शुरुआती 48 घंटे को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। पुलिस को 24 घंटे के भीतर जिपनेट पर जानकारी अपलोड करनी होती है और 12 घंटे के भीतर देशभर में सूचना प्रसारित की जाती है।
इसके अलावा बॉर्डर चेक पोस्ट को तुरंत अलर्ट करने, मीडिया के जरिए प्रचार-प्रसार करने और मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने जैसे निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के लिए नियमित समीक्षा और कार्रवाई की निगरानी भी तय की गई है।
📍लापता बच्चों को ढूंढने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की व्यवस्था भी लागू है। वहीं आम जनता के लिए 112, 1090 और 1094 जैसे हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
इन आंकड़ों ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और मानव तस्करी के खिलाफ चल रही लड़ाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासन बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है, जिसमें सतर्कता और सामूहिक प्रयास की जरूरत है।
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