एक हेड कांस्टेबल कैसे और कहां बन गया चौकी प्रभारी

जी. पी.दुबे
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NGV PRAKASH NEWS

पुलिस अधीक्षक को हेड कांस्टेबल पर आया भरोसा -बना दिया चौकी प्रभारी

कन्नौज. उत्तर प्रदेश…
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में कैसा मामला सामने आया है जिसमें पुलिस अधीक्षक द्वारा एक हेड कांस्टेबल को चौकी का प्रभारी बना दिया गया है |
कन्नौज में चौकी इंचार्ज और कुछ पुलिस के सिपाहियों के तबादलों की एक लिस्ट सामने आई जिसमें पुलिस अधीक्षक द्वारा बड़े पैमाने पर यहां पर प्रभारीऔर हेड कांस्टेबल, कांस्टेबल के तबादले किए थे |
लेकिन उसमें एक हेड कांस्टेबल का तबादला देखकर लोगों को विश्वास नहीं हुआ क्योंकि इसमें एक हेड कांस्टेबल को पुलिस अधीक्षक द्वारा चौकी प्रभारी बना दिया गया था |
मिली जानकारी के अनुसार एटा के अलीगंज निवासी सुधीर सिंह चौहान 2011 में पुलिस में भर्ती हुए थे |
वह अपना काम बेहद ईमानदारी के साथ करते हुए कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल हो गए | ईमानदारी और उनकी अपने काम के प्रति लगन को देखते हुए पुलिस अधीक्षक नें बगैर किसी प्रमोशन के चौकी प्रभारी नियुक्त कर दिया |
हेड कांस्टेबल द्वारा तबादले की लिस्ट में अपने नाम के आगे चौकी इंचार्ज लिखा देखा तो वह हैरान रह गया |
लोगों के अनुसार पुलिस अधीक्षक ने सुधीर सिंह के काम से प्रसन्न होकर उनका चौकी प्रभारी बनाया |
2015 में इत्रों की नगरी कन्नौज आए सुधीर सिंह को सबसे पहले तिर्वा थाने में तैनाती मिली थी | जिसके बाद 2020 में वह गुरसहायगंज थाने में रहे | गुरसहायगंज थाने में ड्यूटी के दरमियान उन्होंने अपने अधिकारियों के साथ मिलकर कुछ ऐसी घटनाओं पर काम किया जिसको लेकर उनकी बहुत चर्चा हुई |
सुधीर सिंह द्वारा लगातार अपनी मेहनत और लगन से अपनी ड्यूटी करते चले आ रहे हैं |
सुधीर के पिता राजीव सिंह एक किसान थे, घर में सुधीर की मां, एक छोटी बहन और सुधीर सहित चार भाई हैं | सबसे बड़े भाई संजय आर्मी में है, दूसरे नंबर पर सुधीर आते हैं, तीसरे नंबर पर अनुज हैं, वह भी आर्मी में है और चौथे नंबर के भाई चंदन सिंह एमआर हैं |
देश के प्रति कुछ कर गुजरने की ललक उनको उनके भाइयों से ही मिली |
सुधीर ने पुलिस फोर्स जॉइन की. सुधीर लगातार अपनी मेहनत और अपनी लगन के दम पर आगे बढ़ते रहे. कभी भी उन्होंने पीछे मुड़ के नहीं देखा. गुरसहायगंज क्षेत्र में एक बच्ची के साथ दरिंदगी के मामले में सुधीर ने बड़ी भूमिका निभाई थी | उन्होंने एक बेगुनाह की जान बचाई तो वहीं मुख्य आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचानें मैं अपना योगदान दिया |
उनके सहकर्मियों के अनुसार सुधीर का व्यवहार भी सभी के प्रति बहुत ही नरम रहता है |
सुधीर सिंह के इन्हीं गुना को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कन्नौज अमित कुमार आनंद ने उनको यह ईनाम दिया | वहीं सिपाही की लिस्ट में अपने तबादले का थाना ढूंढ रहे सुधीर को जब मालूम चला कि उसको चौकी इंचार्ज बनाया गया है उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा |
वहीं पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने बताया पैरा 58 पुलिस रेगुलेशन के तहत यह किया जा सकता है |सुधीर लगातार कड़ी मेहनत से अपनी वर्दी के प्रति पूरी ईमानदारी से काम कर रहे थे और हमारे जिले में चौकियों की संख्या भी ज्यादा है |
ऐसे में एक नई सोच के साथ इस युवा को यह जिम्मेदारी दी गई है |

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