
जी.पी. दुबे
9721071175
शारदीय नवरात्र: शक्ति की उपासना और नवचेतना का पर्व
3 अक्टूबर 24.
शारदीय नवरात्र भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो देवी दुर्गा की नौ शक्तियों की आराधना का प्रतीक है। यह त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष स्थान है। हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक, नौ दिनों तक यह पर्व बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
शारदीय नवरात्र का महत्व
नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें’, जो हर साल दो बार आती हैं—चैत्र और शारदीय नवरात्रि। शारदीय नवरात्रि विशेष रूप से शक्ति की देवी दुर्गा की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इन दिनों में देवी दुर्गा पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों की सभी कष्टों से रक्षा करती हैं और उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करती हैं।
यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का भी प्रतीक है। रावण पर भगवान राम की विजय को दर्शाने वाला दशहरा इसी नवरात्रि के अंत में आता है। यह पर्व एक तरह से हमें यह सिखाता है कि जीवन में चुनौतियों का सामना धैर्य, शक्ति और सद्गुणों से करना चाहिए।
नौ दिन, नौ रूप
नवरात्रि के हर दिन देवी दुर्गा के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है:
- शैलपुत्री: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं।
- ब्रह्मचारिणी: दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है, जो तपस्या और संयम का प्रतीक हैं।
- चंद्रघंटा: तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की आराधना होती है, जो साहस और शक्ति की देवी हैं।
- कूष्मांडा: चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा होती है, जिनकी मुस्कान से सृष्टि का निर्माण हुआ।
- स्कंदमाता: पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की पूजा होती है, जो ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक हैं।
- कात्यायनी: छठे दिन देवी कात्यायनी की आराधना होती है, जो शक्ति और न्याय की देवी हैं।
- कालरात्रि: सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा होती है, जो नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करती हैं।
- महागौरी: आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है, जो शांति और शुद्धता का प्रतीक हैं।
- सिद्धिदात्री: अंतिम दिन देवी सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है, जो सभी सिद्धियों को प्रदान करती हैं।
नवरात्र का आधुनिक संदर्भ
आज के समय में नवरात्र केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा। इस पर्व को नई पीढ़ी के लोग स्वास्थ्य, योग, और ध्यान के दृष्टिकोण से भी देखते हैं। नौ दिनों का उपवास शरीर को विषमुक्त करता है और ध्यान मन को शांति प्रदान करता है।
इसके अलावा, इन दिनों में देवी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं। इससे सामाजिक समरसता और एकता का भाव भी प्रबल होता है।
नवरात्रि का सांस्कृतिक महत्त्व
देश के विभिन्न हिस्सों में नवरात्रि के दौरान भिन्न-भिन्न प्रकार के आयोजन होते हैं। गुजरात में गरबा और डांडिया का आयोजन धूमधाम से होता है, जबकि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा बड़े स्तर पर मनाई जाती है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और ज्वालामुखी जैसे शक्तिपीठों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
निष्कर्ष
शारदीय नवरात्र केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, यह शक्ति, साहस और आत्म-संयम की प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से हम न केवल देवी दुर्गा की आराधना करते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और सच्चाई के प्रति समर्पण का संदेश भी प्राप्त करते हैं।
शक्ति की आराधना के इस पर्व को सही रूप में मनाने का अर्थ है स्वयं को आंतरिक और बाह्य रूप से सशक्त बनाना, ताकि हम जीवन के हर संघर्ष का सामना दृढ़ता और साहस से कर सकें।
