छठ पूजा के नाम पर चंदा मांगने वाले लोगों को कर रहे परेशान

विजया तिवारी

छठ पर्व के नाम पर चंदा मांगने वाले लोगों को कर रहे परेशान

सिलीगुड़ी 24 अक्टूबर 24
जैसे-जैसे दीपावली और छठ पर्व नजदीक आ रहा है, लोगों का उत्साह दीपावली और छठ पर्व मनाने के लिए बढ़ रहा है और उसकी तैयारी भी चोरों पर चल रही है |
बिहार और बंगाल से चालू हुआ यह त्यौहार आज लगभग पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह पूर्वक मनाया जाता है |
जहां लोगों में इस पर्व के लिए उत्साह है वहीं पर छठ पर्व के नाम पर चंदा वसूलने वाले भी सक्रिय हो गए हैं |
वैसे तो हमारे देश में धर्म के नाम पर हर कोई जितनी उसकी आमदनी है उसके हिसाब से बढ़कर आसानी से चंदा दे देता है | परंतु इस समय चंदा वसूलने में कुछ लोग लोगों को परेशान कर रहे हैं |
वह लोगों से मनमाना चंदा मांग रहे हैं और उनके हिसाब से ना देने पर वह जबरदस्ती चंदा देने के लिए दबाव डाल रहे हैं |
वहीं कुछ लोगों ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा है कि चंदा मांगने वाले उनके घर की परेशानियों तथा उनकी आमदनी को नजर अंदाज कर जबरदस्ती उनके हिसाब से चंदा देने के लिए दबाव डाल रहे हैं |

यहां बताते चलें कि.. लगभग पूरे देश में मनाया जाने वाला या त्योहार मुख्य रूप से बिहार में मनाया जाता था परंतु आज
छठ पर्व बिहार और बंगाल के महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है, जिसे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
यह पर्व मुख्य रूप से सूर्य देवता और छठी मैया की पूजा के लिए जाना जाता है।
बिहार में इसका विशेष महत्व है, लेकिन बंगाल में भी इसे धूमधाम से मनाया जाता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बिहार से आए प्रवासी लोग बसे हुए हैं।

छठ पर्व का महत्व:

छठ पर्व सूर्य उपासना का पर्व है, जो कार्तिक मास में दीपावली के बाद मनाया जाता है |
यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, हालांकि पुरुष भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। लोग इस अवसर पर उपवास रखते हैं और नदियों, तालाबों या अन्य जलाशयों में जाकर सूर्य देवता को अर्घ्य देते हैं।

छठ पर्व की विशेषताएं:

  1. सूर्य देवता की पूजा: छठ पर्व में लोग उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी उपासना करते हैं। मान्यता है कि सूर्य देवता से ऊर्जा और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
  2. नदी किनारे पूजा: पूजा का मुख्य आयोजन नदी या तालाब किनारे होता है। भक्तजन गंगा, कोसी, गंडक आदि नदियों के किनारे एकत्र होते हैं और वहां सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
  3. साफ-सफाई: छठ पर्व में स्वच्छता का विशेष महत्व है। हर पूजा की सामग्री से लेकर पूजा स्थल तक सब कुछ स्वच्छ और पवित्र रखा जाता है।
  4. नहाय-खाय और व्रत: यह पर्व चार दिन का होता है, जिसमें पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, और तीसरे दिन व्रती निर्जला उपवास रखते हैं। चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत समाप्त होता है।

बिहार और बंगाल में छठ पर्व का उत्साह:

बिहार में छठ: बिहार में छठ पर्व का जोश और उल्लास अविश्वसनीय है। यहां छठ पर्व को सार्वजनिक रूप से बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। सभी प्रमुख नदियों और जलाशयों पर पूजा के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। पटना, बिहार का राजधानी शहर, छठ पर्व के दौरान एक प्रमुख स्थल बन जाता है।

बंगाल में छठ: बंगाल में भी यह पर्व धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है, खासकर कोलकाता और अन्य शहरी क्षेत्रों में जहां बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी लोग रहते हैं। कोलकाता के गंगा घाटों पर हजारों की संख्या में लोग एकत्र होते हैं और छठ पूजा करते हैं। बंगाल की संस्कृति में भी यह पर्व अब एक महत्वपूर्ण स्थान बना रहा है।

छठ पर्व का सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू:

छठ पर्व सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है। इसमें समाज के सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होते हैं और मिल-जुलकर इसे मनाते हैं।

अंत में हम कह सकते हैं कि…

छठ पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह प्रकृति और मानव के बीच के अनूठे संबंध को भी दर्शाता है। बिहार और बंगाल के लोग इसे अपनी परंपरा और आस्था के साथ पूरी निष्ठा से मनाते हैं, जो समाज में शांति, एकता और भक्ति का संदेश देता है।

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