अपने 6 हत्याएं की है और आप चाहते हैं आपको जमानत दे दिया जाए- सुप्रीम कोर्ट

Gyan Prakash Dubey

सुप्रीम कोर्ट ने छह हत्याओं के दोषियों की जमानत पर लगाई रोक, हाई कोर्ट के आदेश को दी वैधता

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छह लोगों की हत्या के दोषी चार व्यक्तियों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया। ये याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ थी, जिसमें दोषियों की जमानत रद्द कर दी गई थी। दोषियों को पहले चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने अंतरिम जमानत दी थी, जो बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने रद्द कर दी।

पृष्ठभूमि
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, दोषियों को 10 जनवरी को गणेश बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा पारित एक सामान्य आदेश के तहत अंतरिम जमानत दी गई थी। इस आदेश के तहत सीजेएम को निर्देश दिए गए थे कि वे उन दोषियों को जमानत पर रिहा करें, जिनके छूट या समयपूर्व रिहाई के आवेदन लंबित हैं। इस आधार पर कई दोषियों को जमानत दी गई।

हालांकि, 25 मई को अंबरीश कुमार वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने स्पष्ट किया कि दोषियों की रिहाई का निर्णय केवल राज्य सरकार का अधिकार है और सीजेएम ऐसे निर्देश जारी नहीं कर सकते। इसके बाद हाई कोर्ट ने सीजेएम द्वारा दी गई जमानत को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
यह मामला जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीष चंद्र शर्मा की बेंच के समक्ष आया। बेंच ने दोषियों की दलील खारिज करते हुए कहा, “आपने छह लोगों की हत्या की है और फिर भी सीजेएम ने आपको जमानत दे दी। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ऐसे गंभीर मामलों में जमानत देना न्यायिक प्रणाली को कमजोर करता है।”

दोषियों के वकील ने जमानत रद्द करने के हाई कोर्ट के आदेश को गलत बताया और कहा कि जमानत पहले दी गई थी, जबकि पूर्ण पीठ का फैसला बाद में आया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि सीजेएम को ऐसे मामलों में जमानत देने का अधिकार नहीं है।

यूपी पुलिस पर फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यूपी पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि दोषियों को जमानत देने की प्रक्रिया में राज्य प्रशासन ने गंभीर चूक की है।

इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गंभीर अपराधों में जमानत देने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है, और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

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