सूरत में फर्जी मेडिकल डिग्री बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश: 13 गिरफ्तार,

Gyan Prakash Dubey

सूरत में फर्जी मेडिकल डिग्री बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश: 13 गिरफ्तार, 1500 से अधिक डिग्रियां बेची गईं

सूरत, 6 दिसंबर 2024.
गुजरात के सूरत में एक फर्जी मेडिकल डिग्री बेचने वाले बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गिरोह का मास्टरमाइंड और फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर डॉक्टर के रूप में काम करने वाले लोग शामिल हैं।

👉कैसे हुआ खुलासा?

गिरोह के मास्टरमाइंड की पहचान सूरत निवासी रसेश गुजराती के रूप में हुई है। उसने अहमदाबाद निवासी बीके रावत के साथ मिलकर फर्जी डिग्रियां बनाने और बेचने का धंधा चला रखा था। पुलिस की जांच में पता चला है कि पिछले कुछ वर्षों में गिरोह ने 1,500 से ज्यादा फर्जी डिग्रियां जारी की हैं।

बृहस्पतिवार को पांडेसरा इलाके में छापेमारी के दौरान कई फर्जी डॉक्टर पकड़े गए, जो बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथी मेडिकल साइंस (बीईएमएस) के नकली सर्टिफिकेट के आधार पर प्रैक्टिस कर रहे थे।

👉कितनी महंगी थी ये डिग्री?

पुलिस ने बताया कि इन फर्जी डॉक्टरों ने 60,000 से 80,000 रुपये देकर नकली डिग्रियां खरीदी थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश आरोपी बमुश्किल 12वीं कक्षा पास कर पाए थे।

👉फर्जी डॉक्टरों की प्रैक्टिस

आरोपियों ने बिना किसी मेडिकल प्रशिक्षण के एलोपैथिक दवाइयां देना शुरू कर दिया था। पुलिस को शक है कि राज्यभर में ऐसे सैकड़ों फर्जी डॉक्टर सक्रिय हैं, जो क्लीनिक चला रहे हैं। गिरोह खासतौर पर डॉक्टरों के क्लीनिकों में काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाता था और उन्हें सर्टिफिकेट खरीदकर अपना क्लीनिक खोलने का लालच देता था।

👉फर्जी सर्टिफिकेट फैक्ट्री का मॉडल

गिरोह के सदस्य शुरुआत में इच्छुक लोगों को ढाई साल के प्रशिक्षण का झांसा देते थे, लेकिन यह केवल दिखावा होता था। किसी भी ग्राहक को न तो कोई प्रशिक्षण दिया गया और न ही किसी मेडिकल ज्ञान की जरूरत समझी गई।

👉कानूनी कार्रवाई जारी

पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और राज्यभर में अन्य फर्जी डॉक्टरों की तलाश की जा रही है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

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