डॉ आंबेडकर के पुण्यतिथि 6 दिसंबर पर विशेष: सोते-सोते हो गया निधन -कैसे गुजरे उनके आखिरी कुछ घंटे

Gyan Prakash Dubey

अंबेडकर के पुण्यतिथि पर विशेष: 6 दिसंबर को सोते-सोते हो गया निधन कैसे गुजरे थे उनके आखिरी घंटे

6 दिसंबर 24.
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन और उनकी अंतिम रात उनके संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है।
6 दिसंबर 1956 को, जब उन्होंने अंतिम सांस ली, तब तक वे अपने विचारों और सिद्धांतों के लिए सक्रिय रूप से समर्पित थे। उनकी मृत्यु से पहले की घटनाएं उनकी व्यस्त और प्रतिबद्ध दिनचर्या को दर्शाती हैं।

*👉डॉ. अंबेडकर की अंतिम रात

5 दिसंबर की सुबह, डॉ. अंबेडकर ने सामान्य दिनचर्या के तहत देर से सोकर उठे। उनके सहायक नानक चंद रत्तू ने दफ्तर जाने की अनुमति मांगी और उन्हें शाम तक अकेले छोड़ दिया गया। दिन में उनकी पत्नी सविता और डॉक्टर मालवंकर खरीदारी के लिए बाजार गए।

शाम को जब रत्तू लौटे, तो डॉ. अंबेडकर ने उन्हें टाइपिंग के लिए कुछ काम सौंपा। उनकी नाराजगी का भी सामना करना पड़ा, लेकिन रत्तू ने उन्हें शांत किया। रात के समय उन्होंने जैन धर्म के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और बौद्ध धर्म व जैन धर्म पर चर्चा की।

👉 डॉक्टर अंबेडकर की आखिरी रात की दिनचर्या

रात में डॉ. अंबेडकर ने गहरी तन्मयता से “बुद्धं शरणं गच्छामि” का गान किया और बिस्तर के पास किताबें रखवाईं। उन्होंने थोड़ी देर “द बुद्धा एंड हिज धम्मा” की भूमिका पर काम किया और फिर किताब पर हाथ रखकर सो गए।

👉6 दिसंबर की सुबह

सुबह 6:30 बजे, जब श्रीमती सविता अंबेडकर ने उन्हें देखा, तो वे शांत पड़े थे। नानक चंद रत्तू ने उन्हें पुनर्जीवित करने की कोशिश की, लेकिन डॉ. अंबेडकर का निधन हो चुका था।

👉अंतिम संस्कार

उनकी मृत्यु की खबर तेजी से फैली। उनकी पत्नी ने सारनाथ में अंतिम संस्कार की इच्छा जताई थी, लेकिन मुंबई के चौपाटी पर बौद्ध रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया। हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

डॉ. अंबेडकर का जीवन और उनकी अंतिम रात एक प्रेरणा है कि वे अपने विचारों और सिद्धांतों के लिए अंत तक समर्पित रहे।

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