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बांग्लादेश में लाखों हिन्दू -दलितों के दमन पर कांग्रेस सपा की खामोशी चिंताजनक -डॉक्टर निर्मल
बस्ती 13 दिसंबर 24.
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय का 90 प्रतिशत हिस्सा दलित समाज का है जो वर्तमान समय में गंभीर संकट का सामना कर रहा है |
उपरोक्त बातें सर्किट हाउस बस्ती में आयोजित प्रेस वार्ता में विधान परिषद सदस्य और अध्यक्ष डॉ आबेडकर महासभा ट्रस्ट डॉक्टर लालजी प्रसाद निर्मल ने इस ज्वलंत मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा |
उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान विभाजन के समय बंगाल के प्रमुख दलित नेता योगेंद्र नाथ मंडल जो डॉक्टर अंबेडकर के समकालीन थे | जिनको कांग्रेस द्वारा अपेक्षा मिलने के कारण वह मुस्लिम लीग के प्रभाव में आकर पूर्वी पाकिस्तान चले गए |
जहां भी प्रधानमंत्री जिन्ना के मंत्रिमंडल में कानून मंत्री बने लेकिन जल्द ही उन्हें दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों और नरसंहार का सामना करना पड़ा |
लाखों दलितों की हत्या और महिलाओं के साथ बलात्कार के बाद उनका पाकिस्तान से मोह भंग हो गया |
अंततः 8 अक्टूबर 1950 को उन्होंने पाकिस्तान से भाग कर भारत की शरण ली और भारत से ही अपने पद से त्यागपत्र पाकिस्तान सरकार को भेज दिया।
डॉ निर्मल ने बताया कि वर्तमान समय में बांग्लादेश में हिंदू दलित अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है जिस पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की खामोशी चिंता का विषय है |
उन्होंने कहा कि सारी पार्टियां इस पर अपनी चिंता प्रकट कर चुकी हैं लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मुस्लिम वोटो के तुष्टिकरण के कारण चुप है |
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पिछले चुनाव में दलित हितैषी बनने का दिखावा कर रही थी | जबकि बांग्लादेश में लाखों दलितों का उत्पीड़न हो रहा है और वह इस मामले में चुप बैठी हैं | उन्हें केवल अपना वोट बैंक नजर आ रहा है |
उन्होंने कहा कि बाबा भीमराव अंबेडकर भारत के विभाजन के खिलाफ थे | लेकिन विभाजन होने पर उन्होंने कहा कि जब विभाजन हो रहा है तो पूरी तरह होना चाहिए पूरे हिंदूओं को भारत में और पूरे मुस्लिमों को पाकिस्तान जाना चाहिए, नहीं तो आगे चलकर यह बहुत बड़ी समस्या बनेगी | और आज उनकी बात सत्य साबित हो रही है |
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बांग्लादेश के मामले में प्रभावी हस्ताक्षेप की अपील की है साथ ही साथ भारत को बांग्लादेश में हिंदू दलित और बौधो की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क़दम उठाने चाहिए |उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि
👉आपातकालीन स्थिति में इन हिंदू पीड़ितों को को भारत में शरण देने पर विचार भी किया जाना चाहिए |
उन्होंने प्रधानमंत्री से पांच मांग की है 👉 भारत सरकार तत्काल बांग्लादेश से उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता कर हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें..
👉 बांग्लादेश में मानवाधिकार संगठनों को स्वतंत्रता से जांच करने की अनुमति के लिए दबाव डालें..
👉 संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाया जाए और बांग्लादेश को जिम्मेदार ठहराया जाए..
👉भारत हिंदुओं का विशेष रूप से दलित समाज के लिए एक सहयोग मंच का गठन करें ताकि बांग्लादेशी हिंदुओं की मदद के लिए संसाधन जुटाया जा सके..
👉आपात स्थिति में सीधे भारत सरकार हस्ताछेप कर कार्यवाही करें।
एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के अंतरराष्ट्रीय छवि के कारण ही अमेरिका सहित अनेक देशों ने बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न पर रोक लगाने के लिए आवाज उठाई है|


