पति की गोद में तड़पती रही घायल पत्नी, पुलिस बोली – ‘एंबुलेंस हमारी जेब में नहीं है’

Gyan Prakash Dubey

पति की गोद में तड़पती रही घायल पत्नी, पुलिस बोली – ‘एंबुलेंस हमारी जेब में नहीं है’

बिजनौर, 14 दिसंबर 2024

बिजनौर के कोतवाली देहात क्षेत्र में हुई एक दर्दनाक घटना ने पुलिस की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया। डंपर की चपेट में आई एक महिला घायल अवस्था में तड़पती रही, लेकिन मदद के लिए गुहार लगाने पर पुलिस ने कथित तौर पर लापरवाही दिखाई। सरकारी एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, और अंततः 40 मिनट बाद एक निजी एंबुलेंस बुलाने के बाद भी महिला की जान नहीं बचाई जा सकी।

👉हादसा जो बदल गया त्रासदी में

रतनपुरा गांव की 48 वर्षीय अंजू देवी अपने बेटे अक्षित के साथ बाइक पर सवार होकर अपनी भांजी की मेहंदी में शामिल होने जा रही थीं। अकराबाद पुलिस चौकी के पास उनकी बाइक को एक तेज रफ्तार मिट्टी के डंपर ने टक्कर मार दी। डंपर का पहिया अंजू देवी के पैर पर चढ़ गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसा पुलिस चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर हुआ, लेकिन मदद नहीं मिली।

👉कटाक्ष ने तोड़ दिया विश्वास

सूचना मिलते ही अंजू देवी के पति देवेंद्र मौके पर पहुंचे और पुलिस से एंबुलेंस बुलाने की गुहार लगाई। मगर, उनका आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने मदद करने की बजाय कटाक्ष करते हुए कहा, “एंबुलेंस हमारी जेब में नहीं है।” यह सुनकर परिवार के होश उड़ गए। सरकारी एंबुलेंस का इंतजार बेकार गया, और अंततः चार हजार रुपए देकर एक निजी एंबुलेंस बुलानी पड़ी।

👉देर हो चुकी थी…

घायल अंजू देवी अपने पति और बेटे की गोद में तड़पती रहीं। परिवार के लाख प्रयासों के बावजूद, एंबुलेंस 40 मिनट बाद पहुंची। अस्पताल ले जाते समय उन्होंने अंतिम सांस ली।

👉पुलिस से उठ गया विश्वास

अंजू देवी के पति देवेंद्र की आंखों में आंसू थे। उन्होंने गमगीन स्वर में कहा, “पुलिस से मेरा विश्वास उठ गया है। समय पर मदद मिलती तो मेरी पत्नी आज जिंदा होती। वह मेरी गोद में तड़पती रही और पुलिस औपचारिकता निभाती रही।”

सवालों के घेरे में पुलिस

यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली और मानवीय संवेदनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या किसी की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी सिस्टम की जेब में छिपी रहनी चाहिए? यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की मार्मिक तस्वीर है।

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