
जी.पी.दुबे
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तिरुवनंतपुरम। केरल की आर्थिक संरचना में एक अनोखी विशेषता है कि यहां का लगभग 25% राजस्व शराब और लॉटरी की बिक्री से आता है। हालांकि, यह राज्य का सबसे बड़ा आय स्रोत नहीं है। केरल का सबसे महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत रेमिटेंस (विदेशों से भेजी गई राशि) है, जिससे राज्य को 30% आय प्राप्त होती है।
शराब और लॉटरी की बिक्री का योगदान
वित्त वर्ष 2023-24 में, शराब और लॉटरी की संयुक्त बिक्री से राज्य को 31,618.12 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।
शराब की बिक्री ने 19,088.86 करोड़ रुपये और लॉटरी ने 12,529.26 करोड़ रुपये का योगदान दिया।
यह कुल राज्य आय का 25.4% हिस्सा है।
केरल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कभी सत्ता में नहीं रही है। इसके विपरीत, गुजरात में, जहां भाजपा लंबे समय से सत्ता में है, शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध है, और इसे ड्राई स्टेट कहा जाता है।
अन्य राज्यों के राजस्व स्रोत
उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा:
कृषि सबसे बड़ा आय स्रोत (35-40%)।
गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु:
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर (40-45%)।
केरल और गोवा:
पर्यटन उद्योग (25-30%)।
झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़:
खनन उद्योग (30-35%)।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम:
हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर (40-45%)।
कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु:
आईटी और आईटीईएस (35-40%)।
असम, मेघालय, मिजोरम:
कृषि और वनस्पति (30-35%)।
त्रिपुरा, नागालैंड:
कृषि और हस्तशिल्प (25-30%)।
अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर:
हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर और खनन (35-40%)।
केरल में लॉटरी की बिक्री से एकत्र किए गए अनक्लेम्ड पुरस्कारों का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। केंद्रीय लॉटरी नियम 2010 के अनुसार, राज्य सरकार को इन रिकॉर्ड्स को बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है, जिससे सटीक आय के आंकड़ों पर असमंजस बना रहता है।
केरल की अर्थव्यवस्था में रेमिटेंस, शराब, और लॉटरी की अहम भूमिका है। हालांकि, बाकी राज्यों में आय के प्रमुख स्रोत अलग-अलग हैं, जैसे कृषि, उद्योग, और पर्यटन। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न राज्यों की आर्थिक संरचना उनके सामाजिक और भौगोलिक हालात पर निर्भर करती है।

