इसरो ने रचा इतिहास :भारत के दो सैटेलाइट्स ने 3 मीटर करीब पहुंचकर एक-दूसरे को निहारा

जी. पी. दुबे
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भारत के दो सैटेलाइट्स ने 3 मीटर करीब पहुंचकर एक-दूसरे को निहारा, ISRO ने रचा नया इतिहास

नई दिल्ली, 12 जनवरी 2025

भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अंतरिक्ष में अपने दो सैटेलाइट्स को बेहद करीब लाकर एक दूसरे से जोड़ने का सफल प्रयोग किया। स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (स्पैडेक्स) नामक इस मिशन में दो उपग्रहों ने एक-दूसरे के मात्र 3 मीटर की दूरी तक आकर न केवल अंतरिक्ष विज्ञान की नई ऊंचाइयों को छुआ, बल्कि भारत को इस तकनीक में महारत रखने वाला दुनिया का चौथा देश बना दिया।

कैसे हुआ यह ऐतिहासिक प्रयोग?

स्पैडेक्स मिशन के तहत ISRO ने दो सैटेलाइट्स को धरती की कक्षा में भेजा। इनमें से एक का नाम “चेसर” और दूसरे का “टारगेट” रखा गया। प्रयोग के दौरान चेसर ने धीरे-धीरे टारगेट के करीब पहुंचकर उसे पकड़ा और फिर डॉकिंग की प्रक्रिया को अंजाम दिया। यह मुलाकात अत्यधिक सटीकता और सुरक्षित तरीके से हुई।
शुक्रवार को दोनों उपग्रह 1.5 किलोमीटर की दूरी पर थे। रविवार तक इन्हें पहले 230 मीटर, फिर 15 मीटर और आखिर में 3 मीटर की दूरी पर लाया गया। इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के दौरान दोनों सैटेलाइट्स ने एक-दूसरे को करीब से “देखा” और फिर धीरे-धीरे अलग हो गए।

ISRO की प्रतिक्रिया

ISRO ने इस उपलब्धि को लेकर उत्साह जाहिर करते हुए कहा, “15 मीटर और फिर 3 मीटर की दूरी पर इसरो के दोनों सैटेलाइट्स की यह कोशिश बेहद सफल रही। अब इन्हें वापस सुरक्षित दूरी पर ले जाया गया है। इस प्रयोग से प्राप्त डेटा का गहन विश्लेषण किया जाएगा, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण होगा।”

स्पैडेक्स मिशन: क्यों है यह खास?

स्पैडेक्स मिशन को 30 दिसंबर को PSLV के माध्यम से लॉन्च किया गया था। यह दो छोटे उपग्रहों का उपयोग कर एक किफायती स्पेस डॉकिंग तकनीक विकसित करने का प्रयास है।
इस तकनीक का उपयोग चंद्रमा पर मिशन, अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण, और चंद्रमा से सैंपल वापस लाने जैसे भविष्य के मिशनों में किया जाएगा। ISRO का यह प्रयास अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता और तकनीकी श्रेष्ठता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

स्पेस डॉकिंग क्या है?

स्पेस डॉकिंग एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें दो अंतरिक्ष यान या सैटेलाइट्स को अत्यधिक नियंत्रित तरीके से एक-दूसरे के करीब लाया जाता है और जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य डेटा शेयर करना, पावर स्रोतों को जोड़ना, या किसी विशेष मिशन को अंजाम देना हो सकता है।

भारत बना चौथा देश

स्पेस डॉकिंग तकनीक में महारत रखने वाले देशों की सूची में भारत ने अमेरिका, रूस और चीन के बाद अपना नाम दर्ज कर लिया है। यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

आगे की योजना

ISRO अब इस प्रयोग के अगले चरणों की योजना बना रहा है, जिसमें रोबोटिक आर्म और अन्य तकनीकी का परीक्षण किया जाएगा। इससे अंतरिक्ष में जटिल अभियानों को अंजाम देना और भी सरल हो जाएगा।

NGV PRAKASH NEWS

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