मरीज नहीं, फर्जीवाड़े की कहानी! सरकारी अस्पताल में डीएम को मिला बड़ा घोटाला

कानपुर: मरीज नहीं, फर्जीवाड़े की कहानी! सरकारी अस्पताल में डीएम को मिला बड़ा घोटाला

कानपुर, 21 फरवरी:

सरकारी अस्पतालों का मकसद गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर इलाज देना होता है, लेकिन जब यही अस्पताल फर्जी आंकड़ों से खेलें, तो सवाल उठना लाजमी है। कानपुर के पटकापुर सरकारी अस्पताल में ऐसा ही बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया, जहां मरीजों के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में झूठी एंट्री की जा रही थी। मामला तब खुला, जब डीएम जितेंद्र कुमार सिंह ने खुद रजिस्टर में दर्ज मरीजों को फोन किया और सच सामने आ गया।

कैसे खुला फर्जी मरीजों का राज?

रविवार को डीएम जितेंद्र कुमार सिंह अचानक बिरहाना रोड स्थित पटकापुर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल की इंचार्ज डॉ. दीप्ति गुप्ता ने उन्हें एक रजिस्टर दिखाया, जिसमें लिखा था कि 25 मरीजों का इलाज हो चुका है। रजिस्टर में नाम और फोन नंबर भी दर्ज थे। लेकिन डीएम को कुछ गड़बड़ लगी, क्योंकि नाम जल्दबाजी में लिखे गए थे। उन्होंने तुरंत कुछ नंबरों पर कॉल किया।

पहला फोन मोहम्मद शाहिद को किया गया। जवाब आया – “सर, मैं तो बीमार ही नहीं हूं, फिर अस्पताल क्यों जाऊंगा?”
डीएम चौंक गए! फिर दूसरे और तीसरे मरीज को कॉल किया, तो सभी नंबर फर्जी निकले। यानि मरीजों का नाम सिर्फ कागजों में था, असल में कोई अस्पताल आया ही नहीं था।

अस्पताल की इंचार्ज ने कबूला घोटाला

डीएम ने जब डॉ. दीप्ति गुप्ता से सवाल किए, तो पहले उन्होंने बहाने बनाए, फिर कबूल किया कि संख्या बढ़ाने के लिए फर्जी मरीजों के नाम दर्ज किए गए थे। डीएम ने तुरंत सीएमओ और स्वास्थ्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया। इसके साथ ही डॉ. दीप्ति गुप्ता को निलंबित करने की सिफारिश भी कर दी गई।

क्या दवाइयों की हेराफेरी हो रही थी?

अब सबसे बड़ा सवाल – इन फर्जी मरीजों के नाम पर सरकारी दवाइयां तो नहीं उठाई जा रही थीं? सरकारी अस्पतालों में मरीजों को फ्री दवा दी जाती है। ऐसे में यह आशंका है कि दवाओं की कालाबाजारी के लिए फर्जी एंट्री की गई हों।

जब मीडिया टीम अस्पताल पहुंची, तो डॉ. दीप्ति गुप्ता अपनी सीट पर बैठी मिलीं। जब उनसे सवाल किए गए, तो पहले कुछ भी कहने से मना कर दिया। लेकिन बाद में “दबाव में ऐसा करने” की बात मान ली। स्टाफ ने बचाव में कहा कि “मरीज कभी-कभी गलत नंबर दे देते हैं,” लेकिन डीएम की जांच में यह दावा झूठा निकला, क्योंकि जिन मरीजों के नाम थे, वे अस्पताल आए ही नहीं थे!

अब आगे क्या?

डीएम ने साफ कर दिया कि इस मामले की गहराई से जांच होगी। अगर फर्जी मरीजों के नाम पर दवा की हेराफेरी हुई है, तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी। सवाल यह भी है कि क्या यह घोटाला सिर्फ इसी अस्पताल तक सीमित है, या फिर पूरे स्वास्थ्य विभाग में ऐसा ही खेल चल रहा है?

NGV PRAKASH NEWS

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