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भारत में पहली बार हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक का ट्रायल रन शुरू
भारत में हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों का ट्रायल रन शुरू हो गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और रिन्यूएबल एनर्जी मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस ऐतिहासिक परीक्षण को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रायल अगले 18 महीनों तक चलेगा और इसके तहत हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों की व्यवहार्यता का मूल्यांकन किया जाएगा।
हाइड्रोजन ट्रकों का निर्माण और परीक्षण
देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने इस ट्रायल की जिम्मेदारी ली है। यह परीक्षण राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत किया जा रहा है, जिसे रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित किया गया है। इस परियोजना का लक्ष्य मालवाहन परिवहन में हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है।
टेस्टिंग की प्रमुख बातें:
- 24 महीने तक चलेगा परीक्षण
- 16 हाइड्रोजन ट्रक शामिल होंगे
- मुंबई, पुणे, दिल्ली-एनसीआर, सूरत, वडोदरा, जमशेदपुर और कलिंगनगर जैसे प्रमुख मार्गों पर किया जाएगा परीक्षण
- हाइड्रोजन आंतरिक दहन इंजन (H2-ICE) और फ्यूल सेल (H2-FCEV) तकनीक से लैस ट्रकों का परीक्षण होगा
ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन हाइड्रोजन की भूमिका
इस अवसर पर नितिन गडकरी ने कहा,
“भारत हर साल 22 लाख करोड़ रुपये फ्यूल इंपोर्ट पर खर्च करता है, जो देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ है। हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी के जरिए हम न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि भविष्य में इसे एक्सपोर्ट करने की भी क्षमता विकसित करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि बायो CNG और पराली से बने बायोप्रोडक्ट के माध्यम से मीथेन और हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा। इससे ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटेगी और भारत आत्मनिर्भर बनेगा।
रिन्यूएबल एनर्जी मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा,
“हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा है और भारत जल्द ही ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व करेगा।”
हाइड्रोजन ट्रक के लाभ
- कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी
- विदेशी मुद्रा भंडार की बचत (तेल आयात पर निर्भरता कम होगी)
- मालवाहन ट्रांसपोर्ट के लिए किफायती विकल्प
- हरित ऊर्जा समाधान के रूप में भारत की अग्रणी भूमिका
आगे की राह
टाटा मोटर्स के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर गिरीश वाघ ने बताया कि इस ट्रायल रन के जरिए ट्रकों की क्षमता और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन किया जाएगा। यह परीक्षण भारत के ट्रांसपोर्टेशन बिजनेस के लिए हाइड्रोजन ईंधन की लागत प्रभावशीलता और लाभ को भी परखेगा।
अगर यह परीक्षण सफल रहा, तो भारत में जल्द ही हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक आम सड़कों पर देखे जा सकेंगे। यह न केवल परिवहन के क्षेत्र में क्रांति लाएगा, बल्कि प्रदूषण को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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