वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता, 50 से अधिक भारतीय विशाल उड़ने वाली गिलहरियां मिली

महाराष्ट्र के जंगलों में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता, 50 से अधिक भारतीय विशाल उड़ने वाली गिलहरियां मिलीं

30 मार्च 2025: महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के नवेगांव नागजीरा टाइगर रिजर्व (NNTR) में वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है। जीवविज्ञानियों की एक टीम ने विशेष सर्वेक्षण के दौरान 50 से अधिक भारतीय विशाल उड़ने वाली गिलहरियां (Indian Giant Flying Squirrel) खोजी हैं। यह सर्वेक्षण इस दुर्लभ प्रजाति की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण के उपायों को ध्यान में रखते हुए किया गया।

NNTR के उप निदेशक पवन जेफ ने बताया कि यह सर्वेक्षण फरवरी माह में चौथे चरण की निगरानी प्रक्रिया के दौरान किया गया था। उन्होंने कहा कि इस सर्वेक्षण से हमें इन दुर्लभ गिलहरियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए प्रभावी रणनीतियां बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह उड़ने वाली गिलहरी मुख्य रूप से भारत, चीन, लाओस, म्यांमार, श्रीलंका, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम में पाई जाती हैं।

भारतीय विशाल उड़ने वाली गिलहरी: एक अनोखा जीव

भारतीय विशाल उड़ने वाली गिलहरी अपने पैरों के बीच फैली झिल्ली की मदद से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक ग्लाइड कर सकती है। यह प्रजाति मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहती है, इसलिए इन्हें रात्रिचर जीव माना जाता है। ये गिलहरियां घने जंगलों में रहना पसंद करती हैं और इनका मुख्य भोजन फूल, फल, बीज और पत्तियां होते हैं।

वैसे तो यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की ‘सबसे कम चिंता’ (Least Concern) वाली श्रेणी में आती है, लेकिन हाल के वर्षों में इनकी संख्या में गिरावट देखी गई है। इसके पीछे वनों की कटाई, शहरीकरण, अवैध शिकार और तस्करी जैसे कारण प्रमुख हैं। इसके अलावा, जंगलों में लगने वाली आग और जलवायु परिवर्तन का भी इनकी जनसंख्या पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

संरक्षण के लिए जरूरी कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इन गिलहरियों के संरक्षण के लिए वनों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवासों को संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। स्थानीय समुदायों को जागरूक करना और उन्हें इस कार्य में शामिल करना भी महत्वपूर्ण है। साथ ही, अवैध शिकार और तस्करी को रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने की आवश्यकता है। अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर इनकी जनसंख्या की निगरानी की जानी चाहिए ताकि इनके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

NGV PRAKASH NEWS

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