इस ढंग से पुलिस ने मारा छापा: देह व्यापार के सरगना को भनक तक नहीं लगी


बस्ती
NGV PRAKASH NEWS | 17 अप्रैल 2025

एक शांत-सी लगने वाली दोमंजिला इमारत, जो टोल प्लाजा के पास कोतवाली क्षेत्र में वर्षों से खामोश खड़ी थी। उसके बाहर से गुजरने वाले कभी सोच भी नहीं सकते थे कि उसकी दीवारों के भीतर एक ऐसा धंधा फल-फूल रहा है, जो समाज की जड़ों को अंदर से खोखला कर रहा था। मगर एक मुखबिर की सूचना ने इस खामोशी को चीर दिया।

16 अप्रैल की देर रात क्षेत्राधिकारी सदर सत्येन्द्र भूषण तिवारी को एक गुप्त सूचना मिली। उन्होंने बिना देर किए अपनी टीम को जुटाया। आस-पास के लोगों से जानकारी ली गई, लेकिन मोहल्ले की चुप्पी बहुत कुछ कह रही थी। कोई खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं था—शायद डर था, या फिर बदनामी का भय।

मगर पुलिस की आंखें अब इस इमारत की ओर टिक चुकी थीं। एक-एक कदम सोच-समझकर रखा गया और फिर अचानक वह क्षण आया—जब मकान का दरवाजा खोला गया और अंदर का नजारा सामने आया।

एक-एक कमरे की तलाशी शुरू हुई। अंदर छह लोग मौजूद थे—पांच पुरुष और एक महिला। पकड़े गए लोगों में 55 साल के शिवमूरत चौधरी भी थे, जो खुद को इस मकान का मालिक बता रहे थे। उनके साथ मौजूद 24 वर्षीय अम्बुज पटेल ने खुद को उनका ‘हिस्सेदार’ बताया। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि यह मकान सिर्फ नाम का आशियाना था, असल में यह एक अड्डा था—जहां महिलाओं को बुलाकर, पैसों के लिए देह को सौदे में बदला जाता था।

शिवमूरत और अम्बुज का यह भी कहना था कि इस धंधे से जो पैसा आता, उसमें से मकान का किराया और लड़कियों को उनका हिस्सा देने के बाद जो बचता, उसे आपस में बाँट लेते थे।

जब कमरे की तलाशी ली गई, तो हालात ने पुलिस के संदेह को यकीन में बदल दिया। वहां से 22 मोबाइल फोन बरामद हुए, ₹40,280 की नगदी, QR कोड, दर्जनों टोकन पर्चियां और उपयोग किए गए कंडोम की थैलियाँ। यह सब उस अंधे धंधे की गवाही दे रहे थे, जो चुपचाप वर्षों से यहां पल रहा था।

बिना किसी शोरगुल के, पुलिस ने पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। फिर मामला दर्ज हुआ—अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम की धाराओं में। छह अभियुक्तों को न्यायालय भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

इस पूरी कार्रवाई में क्षेत्राधिकारी के साथ SOG प्रभारी चंद्रकांत पांडेय और महिला पुलिसकर्मियों की विशेष भूमिका रही। उनके साहस और संयम ने बस्ती शहर को एक ऐसे दलदल से बाहर निकालने की दिशा में पहला कदम दिया, जिसकी गंध समाज को धीरे-धीरे विषाक्त बना रही थी।

मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक अभिनंदन तथा अपर पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह द्वारा भी निरीक्षण किया गया |

पुलिस ने इतने गोपनीय ढंग से वहां छापा मारा की धंधे का संरक्षक तथा अन्य लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी |

यह केवल एक छापा नहीं था। यह एक संदेश था—कि अगर समाज के कोने में कहीं अंधकार पल रहा है, तो कानून की रोशनी वहां ज़रूर पहुंचेगी।

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