पेशाब की थैली में हिलता मिला खून जैसा कीड़ा, मेरठ के इस केस ने डॉक्टरों को भी दहला दिया!

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पेशाब की थैली में हिलता मिला खून जैसा कीड़ा, मेरठ के इस केस ने डॉक्टरों को भी दहला दिया!

क्या आप सोच सकते हैं कि आपके शरीर में चुपचाप कोई खौफनाक जीव पनप रहा हो? और जब उसका सामना हो, तो वो फिल्मी नहीं, बल्कि हकीकत से भी ज़्यादा डरावना हो? ऐसा ही एक सच्चा मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के मेरठ से, जहां एक 35 वर्षीय युवक के साथ जो हुआ, उसने डॉक्टरों तक के होश उड़ा दिए।

ये बात जून 2015 की है। एक युवक तेज़ बुखार, पीला चेहरा और पेशाब न आने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने सोचा, शायद कोई आम संक्रमण है। इलाज शुरू हुआ—एंटीबायोटिक दी गई और पेशाब निकालने के लिए कैथेटर लगाया गया। सब सामान्य लग रहा था… लेकिन सिर्फ अगले दिन तक।

थैली में तड़पता था खौफ…

अगले दिन जब युवक ने पेशाब की थैली (urine bag) पर नजर डाली, तो उसके होश उड़ गए। वो जोर-जोर से चिल्लाने लगा, जैसे किसी बुरे सपने में फंसा हो। थैली में एक 30 सेंटीमीटर लंबा, खून की तरह लाल, तड़पता हुआ कीड़ा हिल रहा था! डॉक्टर दौड़े, देखा, और उनकी भी आंखें फटी की फटी रह गईं।

जांच हुई और पता चला—ये कोई आम कीड़ा नहीं था, बल्कि था Dioctophyma Renale, यानी विशाल किडनी वर्म। यह इंसान के शरीर में पाया जाने वाला सबसे बड़ा परजीवी है। और अगर ये मादा होता, तो लंबाई 1 मीटर से भी ज़्यादा हो सकती थी!

कहां से आया ये राक्षस कीड़ा?

डॉक्टरों ने जब युवक से उसकी खाने-पीने की आदतें पूछीं, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ—वो अक्सर पास के झील से कच्ची मछली खाता था। यहीं से उसे यह परजीवी संक्रमण हुआ। CDC के अनुसार, यह वर्म मीठे पानी की मछलियों और मेंढकों में पनपता है और अधपका खाने पर शरीर में घुस जाता है।

युवक ने बताया कि पहले भी उसने पेशाब के साथ ऐसे कीड़े निकलते देखे थे, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज कर दिया। जब डॉक्टरों ने तीन दिन तक यूरीन की जांच की, तब और कोई कीड़ा या अंडा नहीं मिला। मगर अफसोस की बात यह रही कि इलाज पूरा होने से पहले ही युवक अस्पताल से भाग गया, और फिर उसका कोई पता नहीं चला।

यह एक मेडिकल केस नहीं, एक चेतावनी है

यह केस जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड डायग्नोस्टिक रिसर्च में प्रकाशित हुआ, और डॉक्टरों ने इसे दुर्लभ लेकिन खतरनाक संक्रमण बताया। यदि समय रहते इलाज न होता, तो यह वर्म पूरी किडनी को तबाह कर देता। ऐसे मामलों में अक्सर सर्जरी करके पूरी किडनी निकालनी पड़ती है।

सावधानियां

👉कभी भी कच्ची या अधपकी मछली न खाएं।

👉किसी भी शरीरगत असामान्यता को हल्के में न लें।

👉दूषित पानी से दूरी बनाकर रखें।

क्योंकि अगली बार जब आप मछली खाएं, तो याद रखिए—कोई कीड़ा आपके शरीर में दाखिल होकर चुपचाप अपनी जगह बना सकता है… और तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

NGV PRAKASH NEWS

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