
अगर छिड़ गया तीसरा विश्व युद्ध: सिर्फ 72 मिनट में पांच अरब जिंदगियों का अंत
अगर दुनिया ने तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पार कर ली और यह युद्ध न्यूक्लियर हथियारों से लड़ा गया, तो इंसानियत के इतिहास में यह सबसे भयावह त्रासदी होगी। महज 72 मिनट में दुनिया की पांच अरब से ज्यादा आबादी खत्म हो सकती है। ये सिर्फ बमों के धमाके नहीं होंगे, बल्कि धरती पर एक ऐसा अंतहीन अंधकार छा जाएगा, जो आने वाली कई पीढ़ियों को निगल जाएगा।
जानी-मानी इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट और न्यूक्लियर वॉर एक्सपर्ट एनी जैकबसन का दावा है कि परमाणु युद्ध के परिणाम सिर्फ तत्काल विनाश तक सीमित नहीं होंगे। उनका असर इतना गहरा और व्यापक होगा कि पूरी पृथ्वी एक बर्फीली कब्रगाह बन जाएगी। सूरज की रोशनी, जो जीवन का स्रोत है, जानलेवा ज़हर बन जाएगी। ओजोन लेयर पूरी तरह नष्ट हो जाएगी और ज़िंदा रहना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।
एनी जैकबसन, जो साल 2016 में पुलित्ज़र प्राइज की फाइनलिस्ट रह चुकी हैं, बताती हैं कि यह कोई कल्पना नहीं बल्कि पेंटागन और वैज्ञानिकों की सालों पुरानी रिसर्च का निष्कर्ष है। उन्होंने ‘डायरी ऑफ ए सीईओ’ पॉडकास्ट में इस भीषण संभावना पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि कैसे एटमॉस्फेरिक साइंस के प्रोफेसर ब्रायन टून की रिसर्च इस खतरे की पुष्टि करती है—जिसके मुताबिक धरती का तापमान इतना गिर जाएगा कि कोई भी जीवित नहीं रह पाएगा।
खास बात ये है कि इस तबाही के बीच भी सिर्फ दो देश होंगे जो इस प्रलय से किसी हद तक बच पाएंगे—न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया। इन देशों की भौगोलिक स्थिति और जलवायु की स्थिरता उन्हें वैश्विक ठंड से बचा पाएगी और वहां खाद्य उत्पादन की संभावना बाकी रहेगी।
लेकिन बाकी दुनिया के लिए, एक भयावह भविष्य इंतज़ार कर रहा है—बर्फ से ढकी ज़मीन, जहरीली हवा, और भोजन की तलाश में एक-दूसरे से लड़ते लोग। ये सिर्फ चेतावनी नहीं है, बल्कि एक गंभीर सच्चाई है, जिसे अनदेखा करना इंसानियत के लिए घातक हो सकता है।
NGV PRAKASH NEWS

