पाकिस्तान से अब केवल “पीओके” पर ही बात होगी: ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं केवल स्थगित हुआ है -मोदी

ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर: पाकिस्तान की हार, भारत की रणनीति और दुनिया को मिला स्पष्ट संदेश
— NGV PRAKASH NEWS

नई दिल्ली 12 मई 25..

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हालिया सैन्य संघर्ष, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जाना गया, अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि यह सिर्फ एक जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की आतंकवाद के खिलाफ बदलती सैन्य नीति का ऐलान भी था। इस पूरे अभियान और सीजफायर को लेकर कई सवाल खड़े हुए — क्या भारत ने पाकिस्तान को अधमरा छोड़ दिया? क्यों सीजफायर हुआ? क्या ऑपरेशन सिंदूर खत्म हो गया? इन सभी का जवाब खुद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के सामने रखा, तथ्यों और आत्मविश्वास के साथ।

ऑपरेशन सिंदूर: एक सटीक और निर्णायक हमला

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत भारत ने पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकवादी शिविरों और सैन्य ठिकानों को अत्यंत सटीकता से निशाना बनाया। भारतीय मिसाइल और ड्रोन हमलों ने विशेष रूप से पाकिस्तान वायुसेना के अहम एयरबेसों को तहस-नहस कर दिया — खासतौर पर सियालकोट, बहावलपुर और रावलपिंडी के निकटवर्ती अड्डे गंभीर क्षति के शिकार हुए। यह वे ठिकाने थे जिन पर पाकिस्तान को अत्यधिक गर्व था और जो अक्सर भारत के खिलाफ आतंकियों को प्रशिक्षण देने के केंद्र बने हुए थे।

सूत्रों के अनुसार, भारत ने पहले 72 घंटों में ही पाकिस्तान को सामरिक, मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक मोर्चे पर गंभीर नुकसान पहुंचाया। सैटेलाइट इमेज और खुफिया रिपोर्टों में दर्ज है कि भारत के प्रहारों के बाद पाकिस्तान में कम-से-कम 13 प्रमुख आतंकी शिविर पूरी तरह से नष्ट हो गए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के ठिकाने शामिल थे।

सीजफायर की पहल किसने की?

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत ने सीजफायर की पहल नहीं की। 10 मई की दोपहर को पाकिस्तान की सेना ने भारत के डीजीएमओ से संपर्क किया और अनुरोध किया कि भारत सैन्य कार्रवाई रोके। पाकिस्तान ने यह आश्वासन दिया कि वह न केवल अपनी ओर से आतंकी गतिविधियां रोकेगा बल्कि भविष्य में कोई दुस्साहस नहीं करेगा।

इससे पहले तक पाकिस्तान दुनिया भर में शांति की अपील करता फिर रहा था — अमेरिका, चीन, यूएन, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों के माध्यम से भारत तक संदेश पहुंचाए जा रहे थे। हालांकि, पीएम मोदी ने यह दो टूक कहा कि भारत ने किसी तीसरे देश की मध्यस्थता के कारण सीजफायर नहीं किया। भारत ने यह निर्णय अपने आत्मविश्वास और रणनीतिक गहराई से लिया, जब पाकिस्तान घुटनों पर आ चुका था।

ऑपरेशन सिंदूर: समाप्त नहीं, केवल स्थगित

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है, केवल स्थगित हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का हर कदम अब भारत की निगरानी में होगा, और यदि फिर से आतंकवाद या सैन्य दुस्साहस दोहराया गया, तो भारत की कार्रवाई और भी कठोर होगी।

उन्होंने कहा:

“हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई को अभी सिर्फ स्थगित किया है… भारत की तीनों सेनाएं — वायुसेना, थलसेना, नौसेना, अर्धसैनिक बल — पूरी तरह सतर्क हैं।”

क्या ऑपरेशन सिंदूर भारत की नई नीति है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर अब भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का स्थायी स्तंभ बन चुका है। सर्जिकल स्ट्राइक (2016), बालाकोट एयरस्ट्राइक (2019) के बाद यह तीसरी बड़ी कार्रवाई थी, लेकिन यह अधिक निर्णायक और व्यापक पैमाने पर थी। अब भारत की नीति ‘रोकने के बाद वार’ की नहीं, बल्कि ‘पहले वार, फिर चेतावनी’ की दिशा में बढ़ती दिख रही है।

पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर असर

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और जन असंतोष तेज़ी से बढ़ा है। विपक्षी दलों ने सेना पर सवाल उठाए हैं। आर्थिक स्थिति पहले से ही चरमराई हुई थी और अब सैन्य क्षति ने उसे और बदतर बना दिया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को इस ऑपरेशन में कम-से-कम 200 सैनिकों की क्षति और अरबों रुपये के सैन्य संसाधनों का नुकसान हुआ है।


निष्कर्ष

ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक संदेश है — कि भारत अब आतंकवाद को सीमापार नहीं सहेगा। सीजफायर एक रणनीतिक निर्णय था, कमजोरी नहीं। और यह दुनिया को भी बता दिया गया कि भारत अब निर्णायक है, आत्मनिर्भर है और अपनी सुरक्षा के लिए किसी की अनुमति का मोहताज नहीं।

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