
भारत की ब्रह्मोस स्ट्राइक से थर्राया पाकिस्तान: रावलपिंडी का नूर खान एयरबेस बना सबक, बच गया प्रधानमंत्री कार्यालय
— NGV PRAKASH NEWS
16 मई 2025 —
भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुई चार दिवसीय सैन्य झड़प में जो हुआ, वह आधी सदी में कभी नहीं हुआ था। भारत ने अपनी सैन्य रणनीति और तकनीकी सटीकता का जो प्रदर्शन किया, उसने पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठानों में भूचाल ला दिया। इस पूरे घटनाक्रम में भारत द्वारा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से किया गया हमला एक निर्णायक क्षण के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रह्मोस: टेबल जितने टारगेट पर भी सटीक वार
ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत यही है कि अगर टारगेट 300 किलोमीटर दूर एक टेबल भी हो, तो ये उसी पर जाकर गिरती है — वो भी सेकेंडों में। इसकी गति Mach 3 (सुपरसोनिक) होती है, यानी आवाज से तीन गुना तेज। इसीलिए न पाकिस्तान का कोई एयर डिफेंस सिस्टम काम आया, न ही कोई चेतावनी।
नूर खान एयरबेस पर भारत का सीधा और सटीक वार
भारत ने जिस दिन पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया, उसी दिन पाकिस्तान को समझ में आ गया कि वह पूरी तरह भारत की सैन्य शक्ति के रहमोकरम पर है। नूर खान एयरबेस से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की उड़ानें होती हैं। यह बेस सेना के प्रमुख और परमाणु हथियारों की निगरानी करने वाली इकाइयों के सबसे करीब स्थित है।
उपग्रह चित्रों और अमेरिकी मीडिया संस्थान New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ब्रह्मोस हमलों से पाकिस्तान की सैन्य और सामरिक सुविधाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा। यह हमला सीमित था, परंतु सटीकता में अद्वितीय।
भारत चाहता तो एक मिनट में सब खत्म कर सकता था
पाकिस्तान का प्रधानमंत्री कार्यालय, आर्मी मुख्यालय, स्ट्रैटजिक फोर्स कमांड, न्यूक्लियर लॉंच सेंटर — ये सभी नूर खान एयरबेस से मुश्किल से 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत यदि चाहता, तो 3-4 ब्रह्मोस मिसाइलों को एक साथ दागकर इन सभी ठिकानों को महज एक मिनट में तबाह कर सकता था।
लेकिन भारत ने संयम दिखाया। उसका उद्देश्य पाकिस्तान को तबाह करना नहीं, बल्कि यह संदेश देना था कि भारत अब सिर्फ चेतावनी नहीं देता — वह रणनीतिक प्रहार भी कर सकता है, और वह भी दुनिया की सबसे सटीक सुपरसोनिक मिसाइल के साथ।
ब्रह्मोस की सटीकता का विज्ञान
ब्रह्मोस में आधुनिक Inertial Navigation System, GPS, भारतीय NavIC और रूसी GLONASS के साथ हाइब्रिड नेविगेशन लगा है। इसके अंतिम चरण में एक्टिव रडार सीकर ब्रह्मोस को टारगेट पर सटीक दिशा और गति के साथ मार्गदर्शन देता है। यह “टर्मिनल गाइडेंस” कहलाता है, जिससे यह किसी इमारत के कमरे तक को निशाना बना सकता है।
आखिरी सेकंड तक खुद को एडजस्ट करती मिसाइल
नई पीढ़ी की मिसाइलें जैसे ब्रह्मोस, अग्नि-5, पृथ्वी-3 और ब्रह्मोस-NG में AI-बेस्ड टारगेट ट्रैकिंग और वेपन्स कंट्रोल सिस्टम लगे हैं। ये मिसाइलें अपने अंतिम सेकंड में मौसम, हवा, दुश्मन की गति जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए अपने रास्ते को बदल सकती हैं।
भारत के पास कौन-कौन सी खतरनाक मिसाइलें हैं?
वर्तमान में भारत के पास कई अत्याधुनिक मिसाइलें हैं:
- ब्रह्मोस-ER: 800 किमी रेंज
- ब्रह्मोस-NG: 300 किमी, फाइटर जेट से लॉन्च
- अग्नि-IV और V: इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज
- हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-II: विकासाधीन
- पृथ्वी-III: शॉर्ट रेंज मिसाइल
इन सभी मिसाइलों की खासियत है सटीकता और दुश्मन की चेतावनी प्रणाली को मात देने की क्षमता।
क्यों नहीं किया गया पाकिस्तान का PMO तबाह?
हालांकि भारत के पास सामर्थ्य था कि वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय और सेना मुख्यालय को भी पल में नष्ट कर दे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। क्योंकि भारत का उद्देश्य युद्ध नहीं, बल्कि सामरिक शक्ति और आत्मरक्षा का प्रदर्शन था। यह संयम भारत की परिपक्व कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को भी दर्शाता है।
भारत की ब्रह्मोस स्ट्राइक ने यह साबित कर दिया कि आज की भारतीय सेना केवल प्रतिक्रिया करने वाली नहीं रही, बल्कि रणनीतिक रूप से पहले वार करने और उसे सटीक अंजाम देने में भी सक्षम है। पाकिस्तान इस हमले से कांप उठा, और दुनिया ने भारतीय सैन्य तकनीक की सटीकता और पराक्रम का लोहा मान लिया।
NGV PRAKASH NEWS

