धर्मांतरण का दबाव और कैंसर पीड़ित की चीखें – दरोगा की दबंगई से दहल उठा शहर

धर्मांतरण का दबाव और कैंसर पीड़ित की चीखें – दरोगा की दबंगई से दहल उठा शहर”


कानपुर, 30 मई 2025।
यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन यह हकीकत है – एक कैंसर से जूझते फील्ड अफसर की करुण पुकार, थाने के अंदर की वहशी बर्बरता और धर्मांतरण का गहरा रहस्य।

शहर के काकादेव थाना इस बार चर्चा में नहीं, बल्कि सवालों के घेरे में है। शास्त्री नगर के रहने वाले जय सिंह उर्फ रिंकू (एसबीआई के फील्ड अफसर), जिनका शरीर कैंसर की मार से पहले ही टूटा हुआ था, लेकिन गुरुवार को पुलिस ने उनकी आत्मा को भी कुचल दिया।

रिंकू बताते हैं कि उनके मौसेरे भाई अवनीश सिंह ने ईसाई धर्म अपनाया और उन पर भी धर्म बदलवाने का दबाव बनाया। जब रिंकू ने मना किया, तो इस ‘धर्म परिवर्तन के व्यापार’ ने हिंसा का चोला ओढ़ लिया। लखनऊ में बेटे के इलाज के लिए निकले रिंकू को अवनीश ने भाई अनूप के साथ मिलकर पीटा। पुलिस को बुलाया गया, लेकिन जैसे ही दरोगा सचिन भाटी आए – न्याय की उम्मीद में बैठे रिंकू के लिए सब कुछ पलट गया।

कहानी में एक और मोड़
रिंकू के मुताबिक, थाने में उन्हें उनके छोटे-छोटे बच्चों के सामने दरोगा ने दीवार से सिर टकराया। लातें पेल्विक हिस्से में मारीं – जो पहले से ही कैंसर से ग्रसित था। घायल रिंकू को हवालात में डाल दिया गया।

इतना ही नहीं – जब एसीपी स्वरूप नगर आईपी सिंह पहुंचे और रिंकू ने अपना पक्ष रखने की कोशिश की, तो उसकी हालत और बिगड़ गई। रिंकू बेसुध हो गए। आनन-फानन में उन्हें सर्वोदय नगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

धर्मांतरण का प्रलोभन और पारिवारिक लड़ाई
रिंकू की दर्द भरी दास्तां यहीं खत्म नहीं होती। उनके पिता कैंसर से मर चुके हैं, बेटा सूर्यांश बोनमैरो कैंसर से जूझ रहा है – और इन हालातों में धर्म परिवर्तन का लालच देकर परिवार को तोड़ने का प्रयास? रिंकू का कहना है, “अवनीश ने बीमारी में फायदा दिलाने का वादा करके हमें धर्म बदलने को मजबूर किया।”

थाना प्रभारी मनोज सिंह ने मारपीट के आरोपों को नकारा और कहा, “ये पारिवारिक संपत्ति का विवाद है।” वहीं एसीपी आईपी सिंह ने साफ कहा, “जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।”

फिलहाल सवाल यही है – क्या वर्दी की आड़ में धर्मांतरण का खेल और कैंसर मरीज की चीखें, कभी इंसाफ की दस्तक बन पाएंगी?

NGV PRAKASH NEWS


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