थाना बना जंग का मैदान : मुंशी नें एएसआई को बेहोश होने तक पीटा

चोरों को छोड़ने पर एएसआई और मुंशी में भयंकर भिड़ंत, मारपीट में एएसआई बेहोश — थाने की साख पर उठे सवाल
– पुलिस व्यवस्था पर फिर लगा धब्बा, एसएसपी ने दिए जांच के आदेश

(रांची, 30 जून 2025 | रिपोर्ट: NGV PRAKASH NEWS)

झारखंड की राजधानी रांची से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे की आंतरिक साख और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धुर्वा थाना परिसर में ही एक एएसआई और मुंशी के बीच चोरों को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि मामला मारपीट और बेहोशी तक जा पहुंचा।

आखिर थाने में ऐसा क्या हुआ?

27 जून को रांची के धुर्वा क्षेत्र में ऐतिहासिक रथ मेला आयोजित किया गया था। इसी मेले के दौरान चोरी और छिनतई के आरोप में 12 संदिग्धों को पकड़ा गया और थाने में बंद किया गया। एएसआई सुदीन रविदास ने आरोप लगाया है कि ड्यूटी से लौटने के बाद उन्होंने पाया कि बिना किसी वैध प्रक्रिया के 6 संदिग्धों को थाने से छोड़ दिया गया था। यह काम थाने के मुंशी उदय शंकर यादव ने किया।

जब एएसआई ने इस पर आपत्ति जताई और सवाल किया, तो मुंशी आपे से बाहर हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कहासुनी जल्द ही हाथापाई में बदल गई और मुंशी ने एएसआई सुदीन रविदास के साथ इतनी मारपीट की कि वे बेहोश हो गए। बाकी पुलिसकर्मियों ने किसी तरह बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।


थाने के भीतर ही ‘गुंडागर्दी’?

थाना, जो कानून का केंद्र होता है, वहां पुलिसकर्मी का ही पुलिसकर्मी से मारपीट करना न केवल शर्मनाक है, बल्कि सिस्टम की भीतरी गिरावट का स्पष्ट संकेत देता है। ऐसे में आम जनता को क्या न्याय मिलेगा — यह सवाल खुद पुलिस महकमे के माथे पर लिखा जा चुका है।


एसएसपी तक पहुंचा मामला, कार्रवाई तय

घटना की गंभीरता को देखते हुए एएसआई सुदीन रविदास ने रांची के एसएसपी सह डीआईजी चंदन कुमार सिन्हा से लिखित शिकायत की है। एसएसपी ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।


पहली बार नहीं… पुलिस थानों में अनुशासन टूटने की कड़ी लंबी

धुर्वा थाना की यह घटना पहली नहीं है। इससे पहले लालपुर थाना में भी एएसआई सुनील मुर्मू को दो युवकों रवि रंजन और विनोद ने थाना परिसर में ही बुरी तरह पीटा था। उस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था। इन दो घटनाओं ने पुलिस थानों की सुरक्षा और अनुशासन पर गहरा प्रश्नचिन्ह लगाया है।


जवाबदेही तय होनी चाहिए

सवाल सिर्फ मारपीट का नहीं है, सवाल यह है कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के आधे दर्जन संदिग्धों को थाने से किस आधार पर छोड़ा गया? क्या इसमें किसी दबाव या “सौदेबाज़ी” की भूमिका थी? और अगर एक एएसआई सवाल पूछता है, तो उसे पीटकर चुप कराना क्या पुलिस महकमे की नई परंपरा बनती जा रही है?


थानों को फिर से ‘थाना’ बनाना होगा

पुलिस महकमे को अब यह गंभीर आत्ममंथन करना होगा कि क्या वर्दी के भीतर ही वर्दी का अपमान करने वालों को संरक्षण दिया जाएगा, या फिर सच्चे कर्तव्यनिष्ठों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सिर्फ अपराधियों से नहीं, कभी-कभी भीतर छिपे ‘अपनों’ से भी सिस्टम को खतरा होता है।

NGV PRAKASH NEWS

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