

तीन महिलाएं चला रही थीं बच्चों की खरीद-फरोख्त का रैकेट, नई दिल्ली से किडनैप कर फरीदाबाद में बेचते थे मासूम
नई दिल्ली/फरीदाबाद।
कांवड़ यात्रा की हलचल और सावन की बारिश के बीच, किसी को क्या पता था कि एक मासूम को लावारिस मानकर उसके मां-बाप तक पहुंचाने वाली फरीदाबाद पुलिस असल में एक सुनियोजित अपहरण की कहानी का हिस्सा बन गई थी। अब दो साल बाद, दिल्ली पुलिस ने उस किडनैपिंग रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया है, जिसने बच्चों को अगवा कर उन्हें बेऔलाद दंपत्तियों को बेचने का धंधा बना लिया था। और चौंकाने वाली बात यह है कि इस रैकेट को तीन महिलाएं चला रही थीं—एक नर्स, एक अकाउंटेंट और एक बच्चा बेचने की एजेंट!
पहली कड़ी: फरीदाबाद में छोड़ा गया बच्चा था किडनैप का शिकार
3 जुलाई 2023 को फरीदाबाद टोल प्लाज़ा के पास एक तीन वर्षीय बच्चा लावारिस मिला था। पुलिस ने उसे सुरक्षित कर मां-बाप तक पहुंचा दिया। पर दो साल बाद जब दिल्ली पुलिस ने एक बच्चे की तस्करी गैंग का पर्दाफाश किया, तब जाकर पता चला कि वह बच्चा किडनैप किया गया था।
मास्टरमाइंड महिलाएं: नर्स, अकाउंटेंट और एजेंट
गैंग की मुख्य सरगनाएं थीं—आरती उर्फ रजीना कोती (फरीदाबाद), कांता भुजेल (नर्स, फर्जी नाम डॉ. प्रिया) और निर्मला नेम्मी (अकाउंटेंट)। इनका नेटवर्क बेहद व्यवस्थित था:
- आरती बच्चों को रेलवे स्टेशनों से अगवा करती थी।
- कांता निःसंतान दंपत्तियों को तलाशती थी।
- निर्मला फर्जी दस्तावेज बनवाकर बच्चों को गोद लेने की वैधता का भ्रम देती थी।
तीन किडनैपिंग, तीन सौदे
- 31 जुलाई 2023: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से तीन वर्षीय बच्चे को अगवा किया गया। खरीदार न मिलने पर फरीदाबाद टोल पर छोड़ दिया गया।
- 17 अक्टूबर 2024: एक ढाई वर्षीय बच्चा अगवा कर गाजियाबाद के दंपत्ति को ₹1.2 लाख में बेचा गया।
- 21 जनवरी 2025: चार महीने की बच्ची पहाड़गंज में ₹30,000 में “गोद” दी गई।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह बच्चों को बेचने के बाद सस्ते फोन फेंक देता था, फर्जी पहचान पत्र बनवाता था और गरीब परिवारों के बच्चों को निशाना बनाता था।
आरती की कहानी: घरेलू हिंसा से अपहरण तक
आरती की कहानी भी एक सामाजिक त्रासदी है। पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले की रहने वाली आरती को 18 की उम्र में शादी और दो बच्चों के बाद पति की मारपीट झेलनी पड़ी। फिर 2017 में भागकर फरीदाबाद आई, मजदूर सूरज से शादी की, नाम बदला और फिर गिरोह में शामिल हो गई। आर्थिक तंगी और गर्भपात के बाद उसने बच्चों को किडनैप कर बेचने का रास्ता चुन लिया।
कानून की समझ, गुनाह की योजना
जांच में पता चला कि तीनों महिलाएं अपराध से जुड़े कानूनों की पूरी जानकारी रखती थीं। उन्हें मालूम था कि कितनी उम्र के बच्चे आसानी से “बेचे” जा सकते हैं, कैसे पहचान छुपाई जा सकती है और किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है।
पुलिस ने इस गिरोह पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 143 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। दोषी साबित होने पर उन्हें 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
गोद लेने वाले जोड़े भी संदेह के घेरे में
पुलिस का दावा है कि बच्चों को खरीदने वाले दंपत्तियों ने अनभिज्ञता जताई है, लेकिन जांच में उनका भी परीक्षण किया जा रहा है। दो बिचौलियों की तलाश जारी है, जो सौदे की कड़ियों को जोड़ते थे।
निष्कर्ष:
ये मामला सिर्फ बच्चों की तस्करी का नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था की कमजोरी, गरीबी का फायदा उठाने वाले गिरोहों और कानून के जानकार अपराधियों की क्रूरता का आईना है। अगर समय रहते पुलिस इस गिरोह तक न पहुंचती, तो न जाने कितने और मासूमों की ज़िंदगी अंधेरे में धकेली जाती।
NGV PRAKASH NEWS
