

छांगुर बाबा का धर्मांतरण रैकेट: खून, अंगूठी और 100 करोड़ की इस्लामिक साजिश की खौफनाक कहानी
लखनऊ | विशेष रिपोर्ट | NGV PRAKASH NEWS
उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सिर्फ कानून व्यवस्था को ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को भी हिला कर रख दिया है। इस पूरे प्रकरण का मास्टरमाइंड है — छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन, एक ऐसा नाम जो एक वक्त में सड़कों पर अंगूठी बेचता था, और अब 100 करोड़ रुपये के विदेशी फंडेड धर्मांतरण रैकेट का सरगना बन गया।
काली साधना से लेकर धर्मांतरण तक का सफर
जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा का अतीत रहस्यमय और खौफनाक रहा है। पूर्वांचल के कई जिलों में वह “खून से तंत्र” करने वाला बाबा कहलाता था। सूत्रों के मुताबिक, वह सुनसान जगहों पर पशु बलि और कभी-कभी मानव रक्त या उंगलियों का इस्तेमाल कर अंगूठियों को “रक्त से अभिमंत्रित” कर बेचता था।
स्थानीय लोगों का दावा है कि वह लोगों को डराकर और तंत्र-मंत्र के बहाने लालच और भय दोनों का इस्तेमाल करता था।
धीरे-धीरे उसने अपनी पहचान बदलकर ‘धार्मिक गुरु’ का चोला ओढ़ लिया। धोखे से भक्ति, झूठे इलाज और झूठे करिश्मों के जरिए उसने गरीबों, मजदूरों और लड़कियों को अपने जाल में फंसाना शुरू किया और एक संगठित धर्मांतरण नेटवर्क खड़ा कर लिया।
जातियों के हिसाब से लड़कियों की बोली
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस रैकेट में जाति आधारित रेट कार्ड तैयार किया गया था। एटीएस की रिपोर्ट के मुताबिक:
- ब्राह्मण, क्षत्रिय और सिख लड़कियों के धर्मांतरण पर 15–16 लाख रुपये।
- पिछड़ी जातियों की लड़कियों पर 10–12 लाख रुपये तक।
इन रकमों का भुगतान भारत में नहीं, बल्कि खाड़ी देशों से विदेशी फंडिंग के जरिए किया जाता था। एटीएस को ऐसे बैंक खातों और हवाला चैनलों के सुराग मिले हैं जिनमें 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है।
फर्जी उदाहरण और मक्कारी की हद
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि छांगुर बाबा ने खुद पर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपने करीबी नवीन रोहरा और उसके पूरे परिवार का जबरन धर्मांतरण कराया और फिर उसका नाम बदलकर जमालुद्दीन रखा। इसका इस्तेमाल वह यह दिखाने में करता था कि धर्मांतरण “स्वेच्छा से” हो रहा है।
मधपुर कोठी: रैकेट का हेडक्वार्टर
लखनऊ के पास मधपुर गांव स्थित उसकी आलीशान कोठी इस पूरे रैकेट का मुख्य अड्डा थी। यहां गुप्त तहखाने, डिजिटल सर्विलांस रूम, और लग्जरी सुविधाएं मौजूद थीं। पुलिस को शक है कि इस कोठी में हथियार, फर्जी दस्तावेज और प्रतिबंधित साहित्य भी रखा जाता था।
विदेशी कनेक्शन और 50 से ज्यादा यात्राएं
यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अमिताभ यश के मुताबिक, छांगुर बाबा ने अब तक 50 से अधिक बार खाड़ी देशों की यात्रा की है। बलरामपुर और दिल्ली में उसकी कई संदिग्ध संपत्तियां मिली हैं। अब इस केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय हो गया है और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू हो गई है।
पत्रकार से लेकर तंत्र-भक्त तक, 14 सहयोगियों की तलाश
इस नेटवर्क से जुड़े 14 अन्य प्रमुख सहयोगियों की तलाश में एटीएस और एसटीएफ जुटी हैं। इनमें कथित पत्रकार पैमैन रिजवी, महबूब, पिंकी हरिजन, हाजिरा शंकर और सगीर जैसे नाम शामिल हैं। ये लोग आजमगढ़, औरैया, सिद्धार्थनगर और अन्य जिलों से हैं और इनमें से कई पर पहले से आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
देशव्यापी नेटवर्क और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की आशंका
जांच में संकेत मिले हैं कि छांगुर बाबा का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ था और धर्मांतरण के बाद कई लड़कियों को विदेशों में भेजने की साजिश भी रची जा रही थी। अब एजेंसियां ह्यूमन ट्रैफिकिंग और आतंकी फंडिंग के एंगल से भी जांच कर रही हैं।
