

हिमाचल में आफ़त की बारिश: भूस्खलन, बादल फटने और तूफान ने मचाई तबाही, अब तक 106 मौतें, हजार करोड़ का नुकसान
16 जुलाई 2025 | NGV PRAKASH NEWS
हिमाचल प्रदेश एक बार फिर प्रकृति के कहर से जूझ रहा है। बीते कुछ दिनों से राज्य के कई जिलों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शिमला, बिलासपुर, सोलन समेत चंबा, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में मंगलवार को मूसलाधार बारिश हुई। भारत मौसम विभाग ने 16 से 18 जुलाई तक पूरे राज्य में भारी बारिश के साथ तेज़ आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। साथ ही भूस्खलन की आशंका के मद्देनज़र यलो अलर्ट भी घोषित किया गया है।
बारिश से टूट रहा है हिमाचल का संयम
मौसम विभाग के अनुसार, 21 जुलाई तक बारिश का दौर रुकने की संभावना नहीं है। भारी बारिश के कारण कई जगहों पर तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। ऊना और धौलाकुआं में सबसे अधिक 32.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के अनुसार, 20 जून से 15 जुलाई तक कुल 106 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 62 मौतें सीधे तौर पर बारिश से जुड़ी आपदाओं—जैसे भूस्खलन, बादल फटना, डूबना, बिजली गिरना, और गिरने की घटनाओं—की वजह से हुई हैं। जबकि 44 लोग सड़क हादसों में जान गंवा चुके हैं।
प्राकृतिक आपदाओं ने छीनीं ज़िंदगियां
👉बादल फटने की घटनाएं: 15 मौतें
👉ऊंचाई से गिरना (पेड़/चट्टान): 12 मौतें
👉डूबना: 11 मौतें
👉अचानक बाढ़: 8 मौतें
👉बिजली गिरना व सांप के काटने से: 5-5 मौतें
👉भूस्खलन और आग लगने से: 1-1 मौत
👉जिला मंडी, कुल्लू और किन्नौर सड़क हादसों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
अब तक प्रदेश में 384 मकान पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जबकि 666 मकानों, 244 दुकानों और 850 पशुशालाओं को नुकसान पहुंचा है। बारिश के चलते 171 पेयजल योजनाएं भी बंद हो गई हैं, जिनमें अकेले मंडी में 142 योजनाएं प्रभावित हैं।
सड़क यातायात की बात करें तो राज्य में 199 सड़कें पूरी तरह से बंद हैं। मंडी ज़िले में 141, कुल्लू में 35, कांगड़ा में 10, सिरमौर में 8, ऊना में 3 और चंबा में 2 सड़कें बाधित हैं। सरकार इन्हें खोलने के लिए मशीनरी के साथ युद्धस्तर पर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य को अचानक आई बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं से लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से त्वरित राहत और पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में अब भी भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। पर्यटन पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। कई जगहों पर होटल खाली हो चुके हैं और पर्यटन स्थलों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
हिमाचल एक कठिन दौर से गुजर रहा है। राज्य सरकार और राहत एजेंसियां लगातार काम में जुटी हैं, लेकिन जब तक बारिश थमती नहीं, तब तक मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं।
(NGV PRAKASH NEWS)
