बच्चे के काटने से कोबरा की हुई मौत.

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कोबरा को काटने वाले बच्चे की अनोखी कहानी: बिहार के बेतिया में 1 साल के मासूम ने ज़हर को मात दी

– NGV PRAKASH NEWS
बेतिया | 27 जुलाई 2025

बिहार के पश्चिम चंपारण ज़िले के मझौलिया प्रखंड में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल मेडिकल विज्ञान को चौंका दिया है, बल्कि पूरे इलाके को कौतूहल से भर दिया है। यहां एक साल के मासूम गोविंद कुमार ने कथित रूप से एक ज़हरीले कोबरा सांप को दांतों से काट लिया, जिससे सांप की मौत हो गई, जबकि बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना बीते गुरुवार की बताई जा रही है। गोविंद की दादी मतिसरी देवी के अनुसार, “उसकी मां घर के पीछे लकड़ियां व्यवस्थित कर रही थी। गोविंद वहीं ज़मीन पर खेल रहा था। अचानक झाड़ियों से एक कोबरा सांप निकला, जिसे गोविंद ने पकड़ लिया और दांत से काट डाला। हमारी नजर तब पड़ी जब सांप फड़फड़ा रहा था और बच्चा बेहोश हो गया।”

घबराए परिजन तुरंत गोविंद को मझौलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उसे बेतिया गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इलाज के बाद वह अब पूरी तरह से स्वस्थ है और शनिवार शाम घर लौट आया है।

डॉक्टर भी रह गए हैरान

गोविंद का इलाज करने वाले डॉ. कुमार सौरभ, जो गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं, ने इस घटना को “असाधारण” बताया।

उनके अनुसार, “जब बच्चा हमारे पास आया तो उसके चेहरे, खासकर मुंह के पास काफी सूजन थी। परिजनों ने बताया कि उसने सांप को काटा और शायद उसका थोड़ा हिस्सा निगल भी लिया।”

डॉ. सौरभ कहते हैं, “उस दिन मेरे पास दो केस आए – एक बच्चा जिसे कोबरा ने काटा और दूसरा बच्चा जिसने कोबरा को काटा। सौभाग्य से, दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।”

कोबरा का ज़हर कैसे नहीं फैला?

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. सौरभ बताते हैं,

“जब कोबरा मनुष्य को काटता है तो उसका ज़हर सीधे रक्त प्रवाह में प्रवेश कर न्यूरोटॉक्सिक असर डालता है जिससे नर्वस सिस्टम फेल हो सकता है। लेकिन जब मनुष्य सांप को काटता है, तो ज़हर उसके पाचन तंत्र में जाता है, जहां शरीर की एंज़ाइम प्रणाली उस ज़हर को निष्क्रिय कर देती है।”

हालांकि, वे चेतावनी भी देते हैं कि अगर किसी व्यक्ति के मुंह या गले में छाला, अल्सर या खून का रिसाव हो तो ज़हर का असर घातक हो सकता है।

स्थानीय लोग कर रहे पूजा

मझौलिया के स्थानीय पत्रकार नेयाज़ बताते हैं कि अब बच्चा चर्चा का केंद्र बन गया है। लोग उसे चमत्कारी बच्चा मानकर देख रहे हैं। सावन के महीने में, जहां सांप निकलना आम बात है, वहां इस घटना को लोग ‘भोलेनाथ की कृपा’ मान रहे हैं।

क्या कहता है विज्ञान और आस्था का संतुलन?

यह मामला आस्था और विज्ञान के बीच एक दिलचस्प बहस को जन्म देता है। जहां एक ओर मेडिकल विज्ञान इसे शरीर की रासायनिक क्रिया का परिणाम मानता है, वहीं ग्रामीण परिवेश में इसे एक दैवी चमत्कार के रूप में देखा जा रहा है।

बच्चे की जान बचना निश्चित रूप से एक चमत्कारी संयोग है, लेकिन यह सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है, खासकर बच्चों के संदर्भ में जो हर चीज़ को खेलने की वस्तु समझ लेते हैं।


NGV PRAKASH NEWS

यह घटना विज्ञान और जीवन के संघर्ष में एक अनोखा अध्याय है – जहां ज़हर के सामने एक मासूम की मुस्कान जीत गई।


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