1 अगस्त से यूपीआई के नियमों में हो रहा बड़ा बदलाव.. देखें समाचार..

🔔 नए UPI नियम लागू होंगे 1 अगस्त, दैनिक उपयोग पर होंगे प्रतिबंध


📌 प्रमुख बदलाव (1 अगस्त 2025 से लागू)

1. बैलेंस चेक की सीमा

2. मोबाइल से जुड़े बैंक खातों की जानकारी देखना

3. ट्रांजैक्शन स्टेटस जांचने की सीमा

4. ऑटोपे (Recurring Payments) सीमाएं

5. अन्य महत्वपूर्ण नियम


🧭 ये बदलाव क्यों किए गए?


📌 आपको क्या करना चाहिए?

  • अगर आपके दैनिक व्यवहार में बार-बार बैलेंस चेक शामिल है, तो अब इसकी आदत बदलनी पड़ेगी।
  • वाटर, बिजली बिल, OTT या SIP जैसे recurring पेमेंट्स की टाइमिंग अब पीक समय से बाहर ही लगेगी—तो समय पर लेनदेन सुनिश्चित करें।
  • यदि ट्रांजैक्शन रोक या फेल हो जाए, तो स्टेटस जांच की संख्या और अंतर (90 सेकंड) का ध्यान रखें।

1 अगस्त से UPI के नए नियम लागू, दिनभर बैलेंस चेक करने पर लगेगी सीमा
NGV PRAKASH NEWS विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2025।
1 अगस्त 2025 से यूपीआई (UPI) यूज़र्स के लिए बड़े बदलाव लागू हो जाएंगे। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने नए नियम जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य UPI सर्वर पर बढ़ते लोड को कम करना और लेनदेन को और तेज़ एवं सुरक्षित बनाना है।


🔹 मुख्य बदलाव

  1. बैलेंस चेक की सीमा
    • अब एक ऐप पर दिन में 50 बार से ज्यादा बैलेंस नहीं देखा जा सकेगा।
    • दो ऐप इस्तेमाल करने पर दोनों पर अलग‑अलग 50 बार लिमिट रहेगी।
    • हर सफल ट्रांजैक्शन के बाद बैंक SMS या नोटिफिकेशन के जरिए खाते में शेष राशि खुद भेज देगा।
  2. मोबाइल नंबर से लिंक बैंक खाते देखना
    • मोबाइल नंबर से जुड़े खातों की सूची दिन में केवल 25 बार ही देखी जा सकेगी।
  3. फेल ट्रांजैक्शन का स्टेटस चेक
    • फेल या पेंडिंग ट्रांजैक्शन की स्थिति सिर्फ 3 बार देखी जा सकेगी।
    • हर बार जांच के बीच कम से कम 90 सेकंड का अंतर रखना होगा।
  4. ऑटोपे और रिकरिंग पेमेंट्स
    • नेटफ्लिक्स, EMI, SIP और बिल भुगतान जैसे ऑटोपे अब नॉन-पीक घंटों (सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 से 5 बजे और रात 9:30 बजे के बाद) ही प्रोसेस होंगे।
  5. अन्य नियम
    • 30 दिन में केवल 10 बार ही पेमेंट रिवर्सल (चार्जबैक) का अनुरोध कर सकेंगे।
    • हर बैंक को साल में एक बार सिस्टम ऑडिट कराना अनिवार्य होगा और पहली रिपोर्ट 31 अगस्त 2025 तक जमा करनी होगी।
    • पैसे ट्रांसफर या मर्चेंट पेमेंट जैसे मुख्य लेनदेन इन नियमों से प्रभावित नहीं होंगे।

🔹 ये बदलाव क्यों किए गए?

पिछले कुछ महीनों में बार‑बार बैलेंस चेक और ऑटोपे प्रोसेसिंग की वजह से NPCI के सर्वर पर दबाव बढ़ गया था, जिससे ट्रांजैक्शन फेल और स्लो होने लगे थे।
नए नियमों से—

  • सर्वर लोड कम होगा
  • ट्रांजैक्शन फेल कम होंगे
  • UPI सिस्टम और तेज़ एवं भरोसेमंद बनेगा।

🔹 आपकी तैयारी

  • बार-बार बैलेंस चेक करने की आदत बदलनी होगी।
  • ऑटोपे की टाइमिंग पीक टाइम से हटाकर रखें।
  • ट्रांजैक्शन फेल होने पर स्टेटस चेक लिमिट का ध्यान रखें।

NGV PRAKASH NEWS


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