

दहला देने वाला हत्याकांड — महिला के 19 टुकड़े, छह महीने की साजिश का खौफनाक अंत
तुमकुरु (कर्नाटक) —14 अगस्त 25.
कर्नाटक के तुमकुरु जिले के शांत से दिखने वाले चिम्पुगनहल्ली गांव में एक ऐसी वारदात सामने आई जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया। यहां 42 वर्षीय लक्ष्मीदेवम्मा की हत्या कर उनके शव के 19 टुकड़े किए गए और फिर अलग-अलग 19 जगहों पर ठिकाने लगाए गए। इस खौफनाक साजिश के पीछे उनका अपना दामाद और उसके दो साथी निकले।
खौफ का पहला सुराग — लाश के टुकड़े और आभूषण
शुरुआत में पुलिस को गांव के अलग-अलग हिस्सों से मानव शरीर के टुकड़े मिले। फॉरेंसिक जांच ने पुष्टि की कि ये एक महिला के हैं। टुकड़ों पर मिले आभूषण से यह संकेत मिला कि हत्या लूटपाट के लिए नहीं हुई थी। इसके बाद गुमशुदा महिलाओं की सूची खंगालते हुए पुलिस को लक्ष्मीदेवम्मा का नाम मिला, जिनके पति बासवराज ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
गायब महिला और सफेद SUV का राज़
जांच में खुलासा हुआ कि 3 अगस्त को महिला को आखिरी बार उनकी बेटी तेजस्वी के हनुमंतपुरा स्थित घर से जाते देखा गया था। उसी दिन एक सफेद ब्रेज़ा SUV संदिग्ध हालात में कोराटगेरे की तरफ जाती दिखी, जिसकी नंबर प्लेट अलग-अलग थीं। असली नंबर के जरिए पुलिस उर्दिगेरे गांव के किसान सतीश तक पहुंची।
सतीश का फोन 3 और 4 अगस्त को बंद था, और गवाहों ने बताया कि उसकी खेत में उसी दौरान वह SUV खड़ी देखी गई। पुलिस ने सतीश और उसके सहयोगी किरण को चिंगमगलुरू के पास होरानादू मंदिर से दबोच लिया।
दामाद निकला मास्टरमाइंड
वाहन के दस्तावेज़ खंगालने पर पता चला कि ब्रेज़ा डॉक्टर रामचंद्रैया एस के नाम पर ली गई थी, लेकिन सतीश के नाम पर खरीदने की योजना बनाई गई थी ताकि शक न हो। रामचंद्रैया, लक्ष्मीदेवम्मा की बेटी तेजस्वी का पति है—तेजस्वी उससे 20 साल छोटी और उसकी दूसरी पत्नी है, जबकि पहली पत्नी से तलाक नहीं हुआ। दोनों का एक तीन साल का बच्चा है।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि लक्ष्मीदेवम्मा अपने दामाद की शादी और निजी जिंदगी में दखल दे रही थीं। आरोप ये भी है कि वह अपनी बेटी को गलत धंधे में धकेलने के लिए दबाव डाल रही थीं। रामचंद्रैया को डर था कि सास उसकी जिंदगी और परिवार तबाह कर देगी।
छह महीने की तैयारी और खून से सना अंजाम
रामचंद्रैया ने हत्या की योजना छह महीने पहले बनाई। उसने सतीश और किरण को चार-चार लाख रुपये देने का वादा किया और 50-50 हजार रुपये एडवांस दिए। सतीश उसका पुराना मरीज था और किरण, सतीश का चचेरा भाई।
3 अगस्त को, जब लक्ष्मीदेवम्मा बेटी के घर से लौट रही थीं, रामचंद्रैया ने उन्हें घर छोड़ने का झांसा देकर कार में बैठा लिया। कार में सतीश और किरण पहले से मौजूद थे। महिला के बैठते ही दोनों ने उसका गला दबा दिया। अगले दिन धारदार हथियार से शव को 19 टुकड़ों में काटा गया और अलग-अलग जगह फेंक दिया गया।
मानव बलि की अफवाह और पुलिस का खंडन
शुरुआत में केस को मानव बलि से जोड़ने की बातें उठीं, लेकिन एसपी अशोक केवी ने साफ कहा—”यह हत्या निजी रंजिश का नतीजा है, इसका किसी भी तरह से तंत्र-मंत्र या बलि से कोई संबंध नहीं।”
NGV PRAKASH NEWS
👉 स्रोत टाइम्स ऑफ़ इंडिया और सोशल मीडिया
