


🌊 समुद्र किनारे मिला रहस्यमयी ‘जलपरी कंकाल’, वैज्ञानिक भी हुए हैरान – टेलीस्कोप फिश का अनोखा खुलासा
मुंबई, 14 अगस्त 2025 –
कहानियों और फिल्मों में देखी जाने वाली जलपरी (Mermaid) अब शायद सिर्फ कल्पना न रह जाए। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें समुद्र किनारे मछली-मानव जैसे आकार वाला कंकाल मिला है। दावा किया जा रहा है कि यह जलपरी का कंकाल है। इसकी लंबाई लगभग 1 मीटर है—अगला हिस्सा इंसान की तरह और पिछला हिस्सा मछली की तरह।
यह अवशेष एक मछुआरे को तब मिला जब वह जाल डालने गया था। देखने के बाद वह चौंक उठा और इसे तुरंत मरीन बायोलॉजी लैब भेज दिया गया। एक्स-रे, सीटी स्कैन और डीएनए टेस्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ—यह किसी जीवित प्राणी का वास्तविक हड्डी वाला ढांचा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह प्राकृतिक उत्परिवर्तन (mutation) का परिणाम हो सकता है या फिर किसी प्राचीन समुद्री जीव का अवशेष।
🌐 समुद्री रहस्यों की दुनिया
धरती का 70% हिस्सा समुद्र से घिरा है और वैज्ञानिक मानते हैं कि 80% से अधिक समुद्री जीवन अभी भी खोज से बाहर है। गहराइयों में ऐसे जीव रहते हैं जो इंसानों के लिए पूरी तरह अनजाने हैं—कभी डरावने, कभी अद्भुत।
इसी बीच एक और खोज ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया—एक दुर्लभ और बेहद खूबसूरत मछली, ‘टेलीस्कोप फिश’।
👁 ‘टेलीस्कोप फिश’ – मोती जैसी आंखों वाला रहस्यमयी शिकारी
इस मछली की सबसे खास पहचान है बड़ी और चमकदार आंखें, जो किसी मोती की तरह दमकती हैं। यह आंखें ट्यूब जैसी संरचना वाली हैं जो गहरे अंधेरे में भी रोशनी को इकट्ठा करके दूर तक देखने में मदद करती हैं।
इसमें बायोलुमिनेंस की क्षमता भी है—यानी यह खुद प्रकाश पैदा कर सकती है। यही कारण है कि यह 500 से 3000 मीटर गहराई तक अंधेरे में भी शिकार कर सकती है।
🐟 डरावना लेकिन खूबसूरत
वीडियो में देखा गया कि टेलीस्कोप फिश की आंखें गुब्बारे जैसी और चमकदार मोती जैसी हैं। इसके दांत बेहद नुकीले और मुंह बड़ा है, जिससे यह शिकार को एक ही बार में पकड़ लेती है। शरीर लंबा, चिकना और सफेद रंग का है, जिस पर हल्के भूरे रंग की परत देखी जा सकती है।
इसे देखकर सोशल मीडिया पर लोग रोमांच और भय दोनों महसूस कर रहे हैं। कई का कहना है—अगर यह जीव सामने आ गया तो क्या होगा?
🔍 रहस्य अभी बाकी है
विशेषज्ञ मानते हैं कि जलपरी कंकाल और टेलीस्कोप फिश की खोज एक बार फिर यह साबित करती है कि समुद्र के भीतर जीवन की असली कहानी अभी अधूरी है। यह भी संभव है कि सदियों पुरानी जलपरी की कहानियों के पीछे कहीं न कहीं वास्तविकता का अंश छुपा हो।
(NGV PRAKASH NEWS)
