1लाख का इनामी बदमाश STF के साथ मुठभेड़ में हुआ ढ़ेर..

पूर्वांचल का खूंखार डॉन ढेर: शंकर कनौजिया की कहानी, खून और खौफ से भरी हुई

आजमगढ़, 23 अगस्त 2025 | NGV PRAKASH NEWS

रात का सन्नाटा… और अचानक गोलियों की आवाज़। आजमगढ़ के जहानागंज इलाके की अंधेरी गलियों में गुरुवार की रात पुलिस और अपराध की दुनिया का आमना-सामना हुआ। इसी मुठभेड़ में गिर पड़ा वो नाम, जो पिछले डेढ़ दशक से पूर्वांचल में खौफ का दूसरा नाम बन चुका था – शंकर कनौजिया

अपराध की शुरुआत और खून की पहली दास्तान

शंकर का अपराधों का सफर कोई मामूली नहीं था। साल 2011 में उसने पहली बार अपनी दरिंदगी का सबूत दिया, जब दोहरीघाट में लूट के दौरान विंध्याचल पांडे का गला रेत दिया। उस दिन से पुलिस के रिकॉर्ड में उसका नाम स्थायी रूप से दर्ज हो गया।

लेकिन शंकर यहीं नहीं रुका। जुलाई 2024 में महाराजगंज की सड़कों ने उसकी बेरहमी देखी। उसने शैलेंद्र सिंह का अपहरण किया, लोडर गाड़ी लूटी और फिर शैलेंद्र की हत्या कर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। यह वारदात पूरे इलाके में खौफ की परछाई छोड़ गई।

इनामी बन चुका था आतंक का सौदागर

लगातार फरारी और बढ़ते अपराधों ने पुलिस को मजबूर किया कि उस पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया जाए। लेकिन शंकर कनौजिया पुलिस की पकड़ से बचता रहा। वह हर बार जगह बदलकर, गैंग के दम पर और हथियारों के सहारे कानून को चुनौती देता रहा।

एनकाउंटर की रात

गुरुवार की रात एसटीएफ को खबर मिली – “शंकर जहानागंज में किसी बड़ी वारदात की साजिश रच रहा है।”
फिर क्या था, इलाके को चारों ओर से घेर लिया गया। पुलिस ने सरेंडर का इशारा किया, लेकिन शंकर ने गोलियों की बरसात शुरू कर दी।

फायरिंग चली… अंधेरे में गोलियों की चमक दिखी… और जवाबी कार्रवाई में वही हुआ जो हमेशा अपराध के रास्ते चलने वालों के साथ होता है – मौत।

हथियारों का जखीरा

मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने बरामद किया –

  • एक 9mm कार्बाइन
  • एक 9mm पिस्टल
  • एक खुखरी
  • और दर्जनों जिंदा कारतूस व खोखे।

ये सब उसकी उस दुनिया का सबूत थे, जहां कानून की नहीं बल्कि खूनी खेल की हुकूमत थी।

अपराध का अंत

डॉक्टरों ने अस्पताल में शंकर को मृत घोषित कर दिया। पुलिस का कहना है कि उसकी मौत से पूर्वांचल के अपराध जगत में हलचल मचेगी। वो अपराधी जिसने सालों तक कानून से खेला, आखिरकार उसी कानून की गोली का शिकार हो गया।

उसकी कहानी खत्म हो गई, लेकिन पीछे छूट गईं कई हत्या, अपहरण और खून से सनी दास्तानें, जो पूर्वांचल के अपराध इतिहास में हमेशा याद की जाएंगी।


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