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राजस्थान में बादलों का प्रलय : 69 साल का रिकॉर्ड टूटा, 30 गांव जलमग्न, सेना व एयरफोर्स मोर्चे पर
जयपुर, 26 अगस्त 2025
रेगिस्तान की पहचान रखने वाला राजस्थान इन दिनों मानो समंदर में तब्दील हो गया है। शुष्क जलवायु और तपते रेगिस्तानी विस्तारों के लिए प्रसिद्ध यह राज्य इस वक्त मूसलाधार बारिश की मार झेल रहा है। पिछले 69 साल का रिकॉर्ड टूटा है और हालात ऐसे बन गए हैं कि नदियां, तालाब और बांध सब कुछ अपनी सीमा लांघकर लोगों के जीवन को डुबो देने पर आमादा हैं।
2024 में ही राजस्थान औसत से 156% अधिक वर्षा दर्ज कर चुका था, जबकि 2025 के जुलाई तक यह आंकड़ा 177% पहुंच गया। और अब अगस्त की बारिश ने स्थिति को भयावह बना दिया है। राज्य के 18 बड़े बांध ओवरफ्लो हो चुके हैं, जबकि 30 में से 22 जिले सीधे तौर पर बाढ़ के संकट से जूझ रहे हैं।
नदियां उफान पर, गांव कटे – लोग फंसे
केंद्रीय जल आयोग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक सवाई माधोपुर जिले के बारांवाड़ा स्टेशन पर चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 4 मीटर ऊपर चला गया है, जिससे लगभग 30 गांव पूरी तरह जलमग्न होकर मुख्य शहर से कट गए हैं। बूंदी जिले में चंबल नदी 9 मीटर ऊपर चली गई और बाढ़ के तेज बहाव में एक 50 वर्षीय महिला की मौत हो गई। वहीं धौलपुर में पानी खतरे के निशान से 7 मीटर ऊपर बह रहा है।
उदयपुर के खंडियोवारी स्टेशन पर तो हालात और भी अचानक बिगड़े। 25 अगस्त की सुबह 7 बजे तक जलस्तर सामान्य था, लेकिन महज़ चार घंटों में नदी का जलस्तर 272.2 मीटर पार कर गया – यह वही खतरनाक निशान है जिसे आखिरी बार 2019 में छुआ गया था।
त्रासदी के बीच मानवीय पीड़ा
इन प्राकृतिक आपदाओं के बीच दर्दनाक घटनाएं भी सामने आ रही हैं। बूंदी जिले में एक स्कूल लेक्चरर और उनकी 3 साल की बेटी की जलकर मौत हो गई, जिसके पीछे दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया जा रहा है। ऐसे हादसे बाढ़ त्रासदी के बीच पीड़ा को और गहरा कर रहे हैं।
राहत व बचाव अभियान – सेना, वायुसेना और SDRF मैदान में
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने एमआई-17 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं ताकि बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और भारतीय सेना मिलकर राहत अभियान चला रहे हैं।
लोकसभा अध्यक्ष व कोटा से सांसद ओम बिरला ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा करते हुए प्रशासन को हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए हैं।
🌧️ राजस्थान बाढ़ 2025 : एक नज़र में
| जिला/स्थान | नदी/बांध | जलस्तर की स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| सवाई माधोपुर (बारांवाड़ा) | चंबल नदी | खतरे के निशान (198 मी.) से 4 मीटर ऊपर | 30 गांव जलमग्न, शहर से कटे |
| बूंदी (लाखेरी) | चंबल नदी | खतरे के निशान से 9 मीटर ऊपर (210.9 मी.) | 1 महिला की मौत |
| धौलपुर | चंबल नदी | खतरे के निशान से 7 मीटर ऊपर | निचले इलाके डूबे |
| कोटा (बड़ौद) | चंबल नदी | खतरे (215 मी.) व चेतावनी (210 मी.) निशान के बीच | बांधों पर दबाव |
| उदयपुर (खंडियोवारी) | स्थानीय नदी/जलाशय | सुबह 7 बजे सामान्य, 11 बजे तक 272.2 मीटर पार | अचानक बाढ़, 2019 के बाद रिकॉर्ड |
| पूरा राज्य | 18 बड़े बांध | सभी बांध ओवरफ्लो | 22 जिले सीधे प्रभावित |
✅ मुख्य तथ्य
- 69 साल का रिकॉर्ड टूटा
- औसत से 177% अधिक बारिश
- 30 गांव जलमग्न
- 18 बांध ओवरफ्लो
- 22 जिले प्रभावित
- सेना, वायुसेना, NDRF/SDRF बचाव अभियान में
विश्लेषण : बदलते मौसम और जल संकट की चुनौती
राजस्थान जैसे राज्य में जहां पानी की एक-एक बूंद तराशी जाती रही है, वहां लगातार हो रही यह बेतहाशा बारिश जलवायु परिवर्तन की ओर गंभीर संकेत दे रही है। यह स्थिति केवल बाढ़ का संकट ही नहीं, बल्कि भविष्य में जल प्रबंधन और आपदा-प्रबंधन की रणनीति को लेकर भी बड़े सवाल खड़े करती है।
अगर समय रहते जल निकासी व्यवस्था, बांधों की सुरक्षा और सुरक्षित पुनर्वास पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो “रेगिस्तान का प्रदेश” आगे चलकर बाढ़ के नए अध्याय का पर्याय बन सकता है।
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