जम्मू -कश्मीर में बादल फटने और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या हुई 38..

जम्मू-कश्मीर में तबाही: बादल फटने और भूस्खलन से 38 की मौत, कई घायल

जम्मू/श्रीनगर, 28 अगस्त 2025
जम्मू-कश्मीर एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की वजह से किश्तवाड़, डोडा और वैष्णो देवी में भारी तबाही हुई है। अब तक 38 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में ज्यादातर तीर्थयात्री उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब से आए हुए थे।

वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बड़ा हादसा

सबसे भीषण त्रासदी माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर अर्द्धकुंवारी के पास हुई। यहां भूस्खलन के मलबे से 28 शव बरामद किए गए। शुरुआती खबरों में 5 मौतें बताई गई थीं, लेकिन जैसे-जैसे बचाव कार्य आगे बढ़ा, मरने वालों की संख्या बढ़ती गई।

डोडा और किश्तवाड़ में तबाही

डोडा जिले में भीषण बारिश और मलबा गिरने से चार लोगों की मौत हुई है। किश्तवाड़ में 14 अगस्त को बादल फटने की घटना से कई लोग पहले ही अपनी जान गंवा चुके थे। अब यह दूसरी बड़ी त्रासदी लोगों को हिला कर रख देने वाली है।

राहत और मुआवजा

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मृतकों के परिजनों को 9 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रियासी में मारे गए अपने राज्य के 11 नागरिकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की है।

सवालों के घेरे में प्रशासन

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि खराब मौसम का अलर्ट पहले से जारी था, इसके बावजूद तीर्थयात्रियों को रोका क्यों नहीं गया। उन्होंने पूछा कि जब हालात बिगड़ने की आशंका थी तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर क्यों नहीं ले जाया गया।

रिकॉर्डतोड़ बारिश और बाढ़ का खतरा

मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू में 24 घंटे में 380 मिमी बारिश हुई है, जो 1910 के बाद से सबसे अधिक है। इससे पहले 1988 में 270 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। झेलम नदी संगम के पास खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

सड़क और संचार व्यवस्था ध्वस्त

भारी बारिश और भूस्खलन के कारण श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग, किश्तवाड़-डोडा-सिंथन-अनंतनाग रोड (NH-244) और मुगल रोड पूरी तरह बंद हो गए हैं। जम्मू के निचले इलाकों से अब तक 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। सेना, NDRF और SDRF राहत कार्यों में जुटी हैं।

इस आपदा ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

(NGV PRAKASH NEWS)

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