NGV PRAKASH NEWS


📍 लखनऊ, 30 अगस्त 2025
भारत की वित्तीय व्यवस्था को हिला देने वाले पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (PACL) घोटाले में आखिरकार बड़ा एक्शन हुआ है। आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (EOW) ने कंपनी के निदेशक गुरजंत सिंह गिल को गिरफ्तार कर लिया है। PACL पर आरोप है कि उसने देशभर के लाखों निवेशकों से करीब 49,000 करोड़ रुपये ठग लिए।
घोटाले का तरीका: भरोसे का जाल, वादों का धोखा
PACL ने खुद को एक कृषि-आधारित कंपनी और जमीन दिलाने वाले संस्थान के रूप में प्रचारित किया। कंपनी का रजिस्ट्रेशन 2011 में राजस्थान से कराया गया और दिल्ली के बारा खंभा रोड पर इसका कॉर्पोरेट ऑफिस खोला गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों में शाखाएं खोली गईं।
- कंपनी ने लोगों से आरडी और एफडी योजनाओं में पैसा जमा कराया।
- प्लॉट (भूखंड) दिलाने का झांसा दिया गया।
- NBFC (नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) का लाइसेंस न होने के बावजूद बैंकिंग गतिविधियां की गईं।
- निवेशकों का न तो पैसा लौटाया गया और न ही वादे के अनुसार जमीन दी गई।
धीरे-धीरे यह घोटाला सामने आया और पता चला कि PACL ने पूरे देश से लगभग 49 हजार करोड़ रुपये हड़प लिए हैं।
यूपी कनेक्शन और कानूनी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के महोबा, सुल्तानपुर, फर्रुखाबाद और जालौन जैसे जिलों में PACL की शाखाएं सक्रिय थीं। जालौन में गबन की शिकायत पर EOW ने जांच शुरू की। जांच में सत्यता मिलने के बाद कानपुर थाने में IPC की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी व फर्जी दस्तावेज) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
पोंजी स्कीम का पैटर्न
PACL घोटाला कोई नया मामला नहीं है, बल्कि भारत में लंबे समय से चल रही पोंजी स्कीम की कहानी का हिस्सा है।
- पहला कदम: कंपनी निवेशकों को जमीन, सोना या मोटे मुनाफे का लालच देती है।
- दूसरा कदम: शुरुआती निवेशकों को पैसा लौटाकर विश्वास जमाया जाता है।
- तीसरा कदम: बड़ी संख्या में लोग जुड़ते हैं और कंपनी अरबों रुपये इकट्ठा करती है।
- अंतिम कदम: अचानक कंपनी बंद हो जाती है और मालिक फरार हो जाते हैं या गिरफ्तारी तक मामला सिमट जाता है।
PACL ने भी यही रास्ता अपनाया। भरोसे का जाल बिछाकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की मेहनत की कमाई डुबो दी।
समाज और निवेशकों पर असर
भारत जैसे देश में जहां बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता अभी भी सीमित है, वहां ऐसे घोटाले सबसे ज्यादा असर डालते हैं। लोग बैंकों की कम ब्याज दर से असंतुष्ट होकर ऐसी कंपनियों के जाल में फंस जाते हैं। PACL घोटाले में लाखों परिवारों की जीवनभर की बचत डूब गई।
निवेशकों को अब भी उम्मीद है कि सरकारी एजेंसियां उनकी रकम की वसूली कर सकेंगी। लेकिन इतनी बड़ी रकम की रिकवरी आसान नहीं है, क्योंकि कंपनी की संपत्तियां सीमित हैं और केस कानूनी दांवपेंच में उलझा हुआ है।
बड़ा सबक
यह घोटाला एक बार फिर साबित करता है कि उच्च मुनाफे का लालच अक्सर धोखाधड़ी की जड़ होता है। सरकार और वित्तीय संस्थानों को जनता में जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि लोग ऐसे जाल में न फंसें। साथ ही नियामक संस्थाओं (जैसे SEBI, RBI) को और कड़ा निगरानी तंत्र बनाना होगा।
गुरजंत सिंह गिल की गिरफ्तारी से जरूर कानून का शिकंजा कसने का संदेश गया है, लेकिन असली चुनौती है—क्या उन लाखों निवेशकों को उनका हक मिल पाएगा जिनकी जमा-पूंजी PACL ने हड़प ली?
📌 PACL केस से जुड़े SEBI और सुप्रीम कोर्ट संदर्भ
- 2014 में SEBI की कार्रवाई
- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने PACL पर आरोप लगाया कि कंपनी ने बिना वैध पंजीकरण के कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) के तहत जनता से अवैध रूप से पैसे जमा किए।
- SEBI ने PACL को आदेश दिया कि वह लगभग 49,100 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाए।
- 2016 – सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
- SEBI के आदेश के खिलाफ PACL ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- सुप्रीम कोर्ट ने SEBI के आदेश को बरकरार रखते हुए निवेशकों का पैसा लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
- अदालत ने पूर्व न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की, जिसे निवेशकों को पैसा वापस करने की जिम्मेदारी दी गई।
- लोढ़ा समिति की भूमिका
- समिति ने PACL की जमीन और अन्य संपत्तियों को बेचकर निवेशकों को पैसा लौटाने का काम शुरू किया।
- लाखों निवेशकों ने अपने दावे समिति के पोर्टल पर दर्ज कराए।
- 2019 – ED की कार्रवाई
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL और उसके निदेशकों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस (PMLA Act के तहत) दर्ज किया।
- ED ने कंपनी की सैकड़ों करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं।
NGV PRAKASH NEWS
