

नई दिल्ली,
01 सितंबर 2025,
सुप्रीम कोर्ट ने आज शिक्षकों की योग्यता और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले पर बड़ा कदम उठाया है। दो जजों की बेंच ने इस मुद्दे को मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया है ताकि इसे सात जजों की बड़ी पीठ द्वारा सुना जा सके।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों की नौकरी में पांच साल से कम सेवा बची है, वे बिना टीईटी पास किए पढ़ा सकते हैं, लेकिन उन्हें इस अवधि में प्रमोशन का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, जिनकी सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा शेष है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कई शिक्षक बिना टीईटी योग्यता के पिछले 20 सालों से अधिक समय से पढ़ा रहे हैं और अब तक उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। इस आधार पर अदालत ने 2014 के उस फैसले पर सवाल उठाया है जिसमें कहा गया था कि आरटीई अधिनियम धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होता।
पीठ का मानना है कि इस फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है और इसीलिए मामला मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया है, ताकि बड़ी पीठ इस पर अंतिम निर्णय ले सके।
📌 यह फैसला न केवल शिक्षकों की नौकरी और योग्यता को प्रभावित करेगा, बल्कि देशभर के अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारों और दायित्वों पर भी गहरा असर डाल सकता है।
— NGV PRAKASH NEWS




