शिक्षकों के हित में सदन से कोर्ट तक होगा संघर्ष-भावुक


सेवायोजित शिक्षकों के हित में सरकार, सदन से लेकर उच्चतम न्यायालय तक जारी रहेगा संघर्ष – भावुक

बस्ती, 05 सितम्बर 2025।
सेवायोजित शिक्षकों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव और शिक्षाविद सूर्य नारायण उपाध्याय ‘भावुक’ ने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष किसी भी स्तर पर रुकने वाला नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि यह संघर्ष सड़क से सदन और सदन से लेकर उच्चतम न्यायालय तक जारी रहेगा।

बस्ती में आयोजित शिक्षकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए भावुक ने हाल ही में 1 सितम्बर 2025 को उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले का गहन अध्ययन कानूनविद कर रहे हैं और जरूरत पड़ी तो संगठन पुनर्विचार याचिका दायर करेगा। उन्होंने मांग की कि 29 जुलाई 2011 को NCTE द्वारा जारी गाइडलाइन से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी परीक्षा लागू नहीं होनी चाहिए, क्योंकि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार कोई भी नया कानून पारित होने के दिनांक से प्रभावी होता है।

भावुक ने शिक्षकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा—
“जिन गुरुओं ने अपने जीवन को राष्ट्र निर्माण में समर्पित कर दिया, आज वही अपने भविष्य को अंधकारमय देख रहे हैं। उनके रोज़गार और प्रमोशन पर संकट मंडरा रहा है। भारतीय समाज में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, ऐसे में शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।”

उन्होंने भरोसा दिलाया कि संगठन इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री, सामाजिक संगठनों और अन्य शिक्षक संगठनों को साथ लेकर सरकार से वार्ता करेगा और संवैधानिक व्यवस्था के तहत समस्या का समाधान निकालेगा।

सम्मेलन में शिक्षक नेताओं का समर्थन
सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिक्षक नेता उदय प्रताप सिंह ने शिक्षकों की लड़ाई में हर संभव सहयोग और संघर्ष में साथ देने का आश्वासन दिया। वहीं, फैजाबाद के साकेत महाविद्यालय के पूर्व छात्र नेता नागेंद्र चौधरी ने कहा कि गुरुओं के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में यह ठाना कि शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष हर हाल में जारी रहेगा।


NGV PRAKASH NEWS

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